उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में पत्नी और दो मासूम बेटियों के हत्यारे को, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
UP News : उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में दो साल पहले हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पत्नी और दो मासूम बेटियों की निर्मम हत्या के दोषी पति देवेंद्र विश्वकर्मा को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि दोषी को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।
उत्तर प्रदेश के महोबा के अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश श्रीमती अपर्णा त्रिपाठी ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपराध की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इसे अत्यंत जघन्य अपराध माना। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार और अभियोजन पक्ष ने संतोष जताया है। अदालत के फैसले को समाज में अपराधियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

17 जुलाई 2023 को हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
दरअसल, यह मामला महोबा शहर कोतवाली क्षेत्र के समदनगर मोहल्ले का है। 17 जुलाई 2023 को हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। आरोपी देवेंद्र विश्वकर्मा शराब और गांजे का आदी बताया गया था और वह अक्सर घर में पैसों तथा घरेलू मामलों को लेकर विवाद करता था। घटना वाले दिन भी घर में विवाद हुआ था. आरोप है कि इसी दौरान देवेंद्र ने अपनी पत्नी रामकुमारी, 9 वर्षीय बेटी आरुषि और 6 वर्षीय बेटी सोनाक्षी पर पत्थर के सिलबट्टे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमला इतना भयावह था कि तीनों के सिर की हड्डियां तक चकनाचूर हो गई थीं। मौके पर ही तीनों की मौत हो गई थी. इस वारदात ने पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश पैदा कर दिया था।
मृतका के पिता ने दर्ज कराया था मुकदमा
घटना के बाद मृतका रामकुमारी के पिता हरिप्रसाद ने अपने दामाद देवेंद्र विश्वकर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाकर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मुकदमे के दौरान शासन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिनेश सिंह और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र प्रताप राजपूत ने अदालत में पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत दलीलें पेश कीं। अदालत में सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से रखा गया। अभियोजन पक्ष ने यह साबित करने का प्रयास किया कि अपराध पूरी तरह सुनियोजित और बेहद क्रूर था।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिनेश सिंह के मुताबिक इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल 9 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें 5 पुलिसकर्मी, एक डॉक्टर और मृतका के परिजन शामिल थे। मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि घटना के समय घर में आरोपी और पीड़ितों के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था। ऐसे में परिस्थितिजन्य साक्ष्य बेहद अहम साबित हुए। जांच में जुटाए गए सभी सबूत आरोपी की ओर इशारा कर रहे थे। अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस जांच और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। इसके बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपी ने अपनी पत्नी और दोनों बेटियों की निर्मम हत्या की थी।
अदालत ने कहा- जघन्य अपराध पर सख्त सजा जरूरी
सभी साक्ष्यों और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी का जघन्य अपराध माना. न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में कठोर सजा समाज में कानून का संदेश देने के लिए आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने दोषी देवेंद्र विश्वकर्मा को मृत्युदंड की सजा सुनाई. फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली और न्यायपालिका पर भरोसा जताया। इस ऐतिहासिक फैसले को महोबा के चर्चित मामलों में शामिल माना जा रहा है। साथ ही यह फैसला महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर सख्त रुख का भी संकेत माना जा रहा है। (एजेंसी)

