संसद में सरकार का बड़ा खुलासा, फल-सब्जियों के 3.1% सैंपल में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक
नईदिल्ली : कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने मंगलवार को संसद को सूचित किया कि पिछले तीन वर्षों में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में परीक्षण किए गए 70,652 फल और सब्जी के नमूनों में से केवल लगभग 3.1 प्रतिशत में ही भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा निर्धारित अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए गए।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू) वर्ष 2005-06 से राष्ट्रीय कीटनाशक अवशेष निगरानी (एमपीआरएएनएल) परियोजना को लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों में कीटनाशक अवशेषों के स्तर का आकलन करना है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा को बताया कि पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) में राष्ट्रीय स्तर पर 70,652 नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से केवल 3.1% (2,223 नमूने) में हीFSSAI द्वारा निर्धारित एमआरएल (अधिकतम अवशेष सीमा) से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए गए। इसका यह अर्थ नहीं है कि बाजार में बिकने वाली हर सब्जी जहरीली है। 96.9% नमूने सुरक्षित पाए गए। यह निगरानी प्रणाली (MPRNL) जो 2005 से लागू है, सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए GPS लोकेशन के माध्यम से कृषि भूमि की निगरानी कर रही है।
भारत फलों और सब्जियों का शुद्ध निर्यातक बना हुआ है, जिसका निर्यात 2016-17 में 2.45 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 3.93 अरब डॉलर (लगभग 5.82 मिलियन टन) हो गया है। हालांकि, घरेलू मांग में वृद्धि के कारण आयात भी 1.78 अरब डॉलर से बढ़कर 3.82 अरब डॉलर हो गया है।
फसल उत्पादन का सटीक अनुमान लगाने के लिए “डिजिटल सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण” अब 23 राज्यों में लागू किया जा रहा है। कटाई संबंधी डेटा मोबाइल ऐप और जीपीएस तस्वीरों का उपयोग करके रिकॉर्ड किया जाता है। हितधारकों के सुझावों के बाद, सरकार ने “ड्राफ्ट शुगर ऑर्डर, 2026” वापस ले लिया है।
खाद्य तेल और रबर की स्थिति
खाद्य तेल आयात कम करने के राष्ट्रीय मिशन के तहत, 298,000 हेक्टेयर भूमि पर पाम की खेती शुरू हो चुकी है और अगले चार से पांच वर्षों में पूर्ण उत्पादन की उम्मीद है। 2025-26 में, भारत ने 905,000 टन रबर का उत्पादन किया, जबकि 459,000 टन का आयात किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव के कारण, रबर की औसत कीमतें ₹197 से बढ़कर ₹253 प्रति किलोग्राम हो गई हैं। आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भय की नहीं, बल्कि जागरूकता की आवश्यकता है। सरकार का ध्यान केवल कीटनाशकों के उपयोग को समाप्त करने पर ही नहीं, बल्कि एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम), डिजिटल निगरानी और आयात पर निर्भरता कम करने के माध्यम से सुरक्षित उत्पादन पर भी है। (एजेंसी)

