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पाकिस्तान में फिर बम धमाका: डेरा इस्माइल खान में भीषण धमाके से 11 की मौत, 30 से ज्यादा घायल; 10 दिन में दूसरा खूनी हमला

पेशावर। पाकिस्तान का अशांत उत्तर-पश्चिमी सीमांत इलाका एक बार फिर खून-खराबे का गवाह बना है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान जिले में शनिवार को हुए एक जबरदस्त बम धमाके में कम से कम 11 लोगों की जान चली गई, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिसके तुरंत बाद इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मलबे में तब्दील हुआ इलाका, राहत कार्य जारी

धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास मौजूद ढांचों और दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, अर्धसैनिक बल और आपातकालीन बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे और सड़क पर लहूलुहान पड़े घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा बलों ने सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं, हालांकि किसी भी गुट ने इस कृत्य की जिम्मेदारी नहीं ली है।

10 दिन पहले कोहाट में हुआ था जुमे की नमाज पर हमला

खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा के हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। अभी महज 10 दिन पहले ही, 18 सितंबर को कोहाट जिले की पुलिस लाइंस स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी उड़ा दी थी। उस फिदायीन हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। कोहाट का खौफ अभी शांत भी नहीं हुआ था कि शनिवार को डेरा इस्माइल खान में हुए इस नए धमाके ने सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

सरकार और सुरक्षा बलों के नियंत्रण से बाहर होता सीमांत क्षेत्र

लगातार हो रहे हमलों से यह साफ हो चुका है कि खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय सशस्त्र चरमपंथी गुटों पर काबू पाने में पाकिस्तानी प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। स्थानीय विद्रोही संगठन लगातार पुलिस चौकियों, सैन्य वाहनों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बना रहे हैं। आए दिन हो रहे इन बड़े धमाकों ने इस्लामाबाद की संघीय सरकार और प्रांतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है।

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