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‘कुर्सियां खाली रहीं, 10 लाख कहां थे?’: संबित पात्रा ने रामलीला मैदान रैली को बताया ‘वेस्ट ऑफ टाइम’

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी दलों के साझा मंच ‘INDIA’ द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूरी तरह ‘विफल’ करार दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस वार्ता में विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘वेस्ट ऑफ टाइम’ बताया। उन्होंने फोटो और आंकड़ों के जरिए दावा किया कि 10 लाख लोगों के आने का ढोल पीटने वाले विपक्षी दल मैदान में साधारण भीड़ तक नहीं जुटा सके।

‘28,000 कुर्सियों में से 7,000 खाली थीं’

संबित पात्रा ने मीडिया के सामने रैली स्थल की तस्वीरें प्रदर्शित करते हुए कहा, “आप पृष्ठभूमि में स्पष्ट देख सकते हैं कि रामलीला मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह खाली पड़ा हुआ था। राहुल गांधी और उनके सलाहकारों ने दावा किया था कि इस आयोजन में 10 लाख लोग शामिल होंगे। जबकि जमीनी हकीकत यह थी कि वहां लगाई गई 28,000 कुर्सियों में से दोपहर 3:30 से 4:00 बजे के बीच 5,000 से 7,000 कुर्सियां खाली थीं। 10 लाख की भीड़ के झूठे दावों की असलियत यही है।”

कांग्रेस नेता पर तीखा तंज कसते हुए पात्रा ने आगे कहा, “10 लाख लोग कहां थे? हमें दिखाइए। इस तरह के हथकंडों और प्रचार ट्रिक्स से कोई बड़ा नेता या देश का प्रधानमंत्री नहीं बनता। PM का मतलब केवल ‘प्राइम मिनिस्टर’ नहीं होता, P का अर्थ पसीना और M का अर्थ मेहनत होता है। प्रधानमंत्री पद पसीने और अथक परिश्रम से हासिल होता है। तमाम दलों और अलग-अलग झंडों को एक मंच पर लाने के बावजूद विपक्ष जनता का विश्वास और समर्थन जुटाने में नाकाम रहा।”

‘चुनाव को कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी?’

राहुल गांधी द्वारा 2024 के आम चुनाव को ‘अवैध’ बताए जाने पर कानूनी तथ्य रखते हुए संबित पात्रा ने विपक्षी आरोपों की हवा निकाली। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 2024 के लोकसभा चुनाव के समय इस पद पर थे ही नहीं, बल्कि वे वर्ष 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “यदि राहुल गांधी के तर्क से 2024 का जनादेश गैर-कानूनी था, तो फिर उसी चुनाव के परिणाम से बने राहुल गांधी खुद भी गैर-कानूनी नेता प्रतिपक्ष (LoP) हैं और उनके सभी सांसद भी गैर-कानूनी हैं। देश में यदि किसी चुनाव पर कोई आपत्ति होती है, तो उसे सक्षम न्यायालय में चुनौती दी जाती है। कांग्रेस, राहुल गांधी या इंडिया ब्लॉक के किसी भी घटक दल ने क्या 2024 के चुनाव के खिलाफ एक भी याचिका दाखिल की है? चुनाव संपन्न होने के ढाई साल बीत जाने के बाद रामलीला मैदान के मंच से किसी लोकतांत्रिक चुनाव को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।”

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