ममता बनर्जी को बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने छोड़ी TMC
तृणमूल कांग्रेस को एक और राजनीतिक झटका देते हुए राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लंबे समय से ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सुष्मिता के अचानक लिए गए इस कदम को आगामी राजनीतिक रणनीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस्तीफे के बाद बढ़ी अटकलें
सुष्मिता देव के इस्तीफे के तुरंत बाद उनके भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में उनकी मुलाकात असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से हुई थी। इसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में उनकी ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
कांग्रेस से TMC तक का सफर
सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था। असम के सिलचर क्षेत्र से आने वाली सुष्मिता ने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता था और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का रुख किया था।
ममता ने दिया था बड़ा राजनीतिक मौका
TMC में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव को पार्टी नेतृत्व ने राज्यसभा भेजा था। उच्च सदन में उन्होंने कई मुद्दों पर सक्रियता दिखाई और पार्टी की प्रमुख महिला चेहरों में शामिल रहीं। यही वजह है कि उनके इस्तीफे को TMC के लिए एक महत्वपूर्ण नुकसान माना जा रहा है।
राज्यसभा में घट सकती है TMC की ताकत
सुष्मिता देव के इस्तीफे से राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। इससे पहले भी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के अलग होने की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सुष्मिता देव किसी नए दल में शामिल होती हैं, तो इसका असर असम और बंगाल दोनों राज्यों की राजनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजर सुष्मिता देव के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है। उनके फैसले से आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं।

