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‘कुर्सी पर नहीं टिक पाएंगे ज्ञानेश कुमार!’ राहुल गांधी की दोटूक चेतावनी, पढ़ें भाषण की 10 बड़ी बातें

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और हालिया चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है। शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10 राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित ‘मॉक संसद’ में विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक सांकेतिक ‘जन महाभियोग’ प्रस्ताव पारित किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की।

मंच से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयोग के अधिकारियों और केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष इस मामले को कतई ठंडा नहीं पड़ने देगा और CEC ज्ञानेश कुमार इस पद पर टिक नहीं पाएंगे।

राहुल गांधी के संबोधन के 10 बड़े बिंदु:

1. ‘पद पर नहीं रह पाएंगे ज्ञानेश कुमार’

राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास ऐसे पर्याप्त साक्ष्य हैं जो मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सत्ताधारी दल उन्हें पद पर बनाए रखने की जिद पर अड़ा रहता है, तो इससे सरकार की मंशा खुद-ब-खुद साफ हो जाएगी।

2. ‘बचकर निकलने की गुंजाइश नहीं’

राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि विपक्ष इस लड़ाई को बीच रास्ते में नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और ‘भारत संघ’ के ढांचे पर चोट करने वालों की पहचान कर जवाबदेही तय की जाएगी।

3. शीर्ष नेतृत्व बनाम नौकरशाही की भूमिका

राहुल गांधी ने कहा कि राजनीतिक स्तर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से विपक्ष राजनीतिक रूप से निपटेगा, लेकिन नौकरशाहों और अधिकारियों को मोहरा बनकर किसी कानूनी या संस्थागत संरक्षण के भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

4. ‘यह महज बैठक नहीं, राजनीतिक हथियार है’

खरगे के आवास पर सांसदों और जनसामान्य के जमावड़े को उन्होंने एक नया ‘राजनीतिक हथियार’ बताया, जिसका मकसद आम जनता के वोट के अधिकार की रक्षा करना है।

5. ‘संस्थानों की आड़ में नहीं बच सकते’

राहुल गांधी ने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर आसीन होने का यह अर्थ नहीं कि व्यक्ति जनता और जनप्रतिनिधियों के सवालों से आजीवन बचा रहेगा। जवाबदेही से कोई नहीं भाग सकता।

6. 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम कटने का आरोप

राहुल गांधी ने गंभीर दावा किया कि मतदाता सूचियों से 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए, जो देश के कुल मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा है।

7. 3% जीत के अंतर और 15% वोटरों का गणित

राहुल गांधी ने 2024 के आम चुनाव के आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि जब चुनावी जीत-हार का औसत अंतर महज 3 प्रतिशत के आसपास रहा हो, तो 15 प्रतिशत मतदाताओं का बाहर होना पूरी प्रक्रिया की साख पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

8. 2024 के लोकसभा चुनाव की साख पर सवाल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अपने बयानों और कार्यप्रणाली से यह प्रतीत होता है कि 2024 का जनादेश पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं था।

9. केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का मुद्दा

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आयोग के अलावा सीबीआई और ईडी जैसी संवैधानिक व स्वायत्त संस्थाओं का भी राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए नुकसानदेह है।

10. संवैधानिक लड़ाई जारी रखने का संकल्प

राहुल गांधी ने कहा कि वे यह बात किसी कटुता से नहीं बल्कि जनता के अधिकारों की चिंता के साथ रख रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कानूनी जवाबदेही तय करने और कड़े कदमों की मांग की।

सांकेतिक प्रस्ताव पारित, आगे का रुख तय

मीरा कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस ‘मॉक संसद’ के माध्यम से विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि वे मतदाता सूची और चुनाव सुधारों के इस मुद्दे को संसद के भीतर और सड़कों पर लगातार उठाते रहेंगे। विपक्ष का कहना है कि संस्थागत शुचिता बहाल करने तक यह अभियान जारी रहेगा।

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