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‘मन की बात’ में राष्ट्र की उपलब्धियों का जिक्र: पीएम मोदी ने अशोक सिंघल को दी श्रद्धांजलि, सर्जिकल स्ट्राइक और डिजिटल जनगणना पर रखी बात

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नियमित रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए भारत की प्रमुख ऐतिहासिक उपलब्धियों, महान विभूतियों के योगदान और राष्ट्रीय विकास के महाअभियान का विस्तृत ब्योरा पेश किया। प्रधानमंत्री ने 27 सितंबर को विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही उन्होंने सीमा पार हुई सर्जिकल स्ट्राइक के एक दशक पूरा होने के ऐतिहासिक अवसर और देश भर में जारी डिजिटल जनगणना की प्रगति साझा की।

अयोध्या आंदोलन और सामाजिक समरसता में अशोक सिंघल का योगदान

प्रधानमंत्री ने स्वर्गीय अशोक सिंघल के जीवन को तपस्या और समर्पण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 27 सितंबर 1926 को आगरा के एक प्रतिष्ठित और साधन संपन्न परिवार में जन्मे अशोक सिंघल ने आईआईटी बीएचयू से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन को उन्होंने जो दिशा, संकल्प और ऊर्जा दी, उसी का सुखद परिणाम है कि आज पूरा विश्व अयोध्या में भव्य राम मंदिर को साक्षात देख पा रहा है। पीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि मंदिर आंदोलन के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक भेदभाव और ऊंच-नीच की कुरीतियों के विरुद्ध भी लंबा जमीनी संघर्ष किया था।

‘दुनिया ने देखा भारत का आतंकवाद विरोधी रुख’

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने 2016 की ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना द्वारा सीमा पार किए गए सर्जिकल स्ट्राइक को एक दिन बाद पूरे 10 वर्ष होने जा रहे हैं। उस साहसिक और सटीक अभियान ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था। प्रधानमंत्री के अनुसार, उस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है और देश की नीति पूरी तरह स्पष्ट और आक्रामक है।

32 करोड़ परिवारों तक पहुंची जनगणना, पहला चरण अंतिम पड़ाव पर

देश में जारी जनगणना के पहले चरण पर ताजा स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में यह कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। अब तक 32 करोड़ से अधिक परिवारों की प्रामाणिक जानकारी दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की अत्यधिक कठिन और बर्फीली भौगोलिक परिस्थितियों में भी प्रगणक पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं। उत्तराखंड के सीमांत गांव माणा में 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत और उत्तरकाशी के बगोरी गांव में हरदेव सिंह राणा द्वारा डिजिटल माध्यम से जानकारी दर्ज करने का प्रेरक उदाहरण भी उन्होंने साझा किया।

‘देश के भविष्य की तस्वीर है जनगणना, 15 मिनट में करें स्व-गणना’

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को याद दिलाया कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि भावी नीतियों के निर्माण के लिए हर नागरिक का राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि अब तक 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा नागरिक आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल से खुद अपना डाटा भर चुके हैं। यह ऑनलाइन सुविधा हिंदी समेत 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसके लिए किसी कागजात को अपलोड करने की जरूरत नहीं होती और मात्र 15 से 20 मिनट के भीतर परिवार का ब्योरा दर्ज कर विशेष आईडी प्राप्त की जा सकती है, जिसे बाद में घर आने वाले गणनाकर्मी को दिखाकर सत्यापित कराया जा सकता है।

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