बिश्केक में आतंकवाद पर बरसे पीएम मोदी, कहा- आतंकी नेटवर्क और पनाहगाहों का पूरा तंत्र खत्म करना जरूरी
बिश्केक/नई दिल्ली। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद आक्रामक और निर्णायक रुख अपनाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की मौजूदगी में पीएम मोदी ने पड़ोसी मुल्क की आतंकी नीतियों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने बिना नाम लिए स्पष्ट किया कि जो देश आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हथियार बनाते हैं और दहशतगर्दों को महफूज ठिकाने देते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि आतंकवाद कभी किसी मुल्क की रणनीतिक संपत्ति नहीं बन सकता। प्रधानमंत्री ने सभी सदस्य राष्ट्रों से इस खतरे के खिलाफ एकजुट होने और दोहरे रवैये को हमेशा के लिए खत्म करने की जोरदार अपील की।
सिर्फ एक्शन-रिएक्शन नहीं, पूरे आतंकी इकोसिस्टम पर वार करने का समय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद आज भी समूची मानवता के लिए सबसे गंभीर चुनौती बना हुआ है। इससे निपटने के लिए सिर्फ हमलों के बाद की जाने वाली प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई पर्याप्त साबित नहीं होगी। अब आतंकवाद के पूरे तंत्र और बुनियादी ढांचे को जड़ से उखाड़ने की सख्त जरूरत है। इसके तहत टेरर फंडिंग के स्रोतों को बंद करना, नई भर्तियों पर रोक लगाना, कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार को थामना और आतंकियों को पनाह देने वाले सुरक्षित ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करना शामिल है। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर यह संदेश जाना चाहिए कि आतंकवाद के मामलों में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अफगानिस्तान में शांति बहाली और पश्चिम एशिया के तनाव पर भारत की चिंता
क्षेत्रीय सुरक्षा पर विचार रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शांत और स्थिर यूरेशिया का सपना तभी साकार हो सकता है, जब अफगानिस्तान में अमन और स्थिरता कायम हो। भारत अफगान नागरिकों के मानवीय सहयोग और सामाजिक विकास के लिए निरंतर अपनी भूमिका निभाता रहेगा। वहीं, पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आगाह किया कि आधुनिक दुनिया में किसी एक इलाके की अशांति सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहती। इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति तंत्र पर पड़ता है, जिसका सबसे घातक प्रभाव विकासशील और गरीब देशों पर पड़ता है। उन्होंने दोहराया कि जंग के मैदान से शांति नहीं निकलती, बल्कि हर विवाद का हल कूटनीति और बातचीत की मेज पर ही मुमकिन है।

