महंगाई का फिर बड़ा झटका! पेट्रोल 367 के पार, डीजल 392 रुपये पहुंचा
पाकिस्तान: महंगाई से जूझ रही जनता को ईंधन की कीमतों ने एक और झटका दिया है। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं। 10 सितंबर से लागू नई दरों में पेट्रोल 3.40 रुपये और डीजल 6.72 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है। ताजा बदलाव के बाद पेट्रोल की कीमत 367.75 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 392.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है क्योंकि लगातार तीसरे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। यानी तीन दिनों के भीतर ही उपभोक्ताओं को तीन बार बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ा है।
तीन दिन में पेट्रोल पर 21.88 रुपये का असर
ईंधन के दाम बढ़ने का सिलसिला 8 सितंबर से शुरू हुआ था। इसके बाद 9 और 10 सितंबर को भी कीमतों में बदलाव किया गया। 8 सितंबर को पेट्रोल 12.90 रुपये और डीजल 3.72 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। इसके अगले दिन यानी 9 सितंबर को पेट्रोल की कीमत में 5.58 रुपये और डीजल में 4.18 रुपये की वृद्धि की गई। अब 10 सितंबर को पेट्रोल में 3.40 रुपये और डीजल में 6.72 रुपये का नया इजाफा किया गया है। तीनों बढ़ोतरी को मिलाकर पेट्रोल की कीमत में कुल 21.88 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 14.62 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ना बनी बड़ी वजह
ईंधन के दामों में तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में आया उछाल अहम कारण है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, कच्चे तेल का आयात करने वाले देशों के लिए इसका सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। आयात लागत बढ़ने के साथ विदेशी मुद्रा पर भी दबाव बढ़ता है।
टैक्स का भी बड़ा हिस्सा
पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत में सरकारी टैक्स और लेवी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार पेट्रोल पर करीब 114 रुपये और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर टैक्स, कस्टम ड्यूटी और पेट्रोलियम लेवी के रूप में वसूल रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और घरेलू टैक्स के दबाव ने ईंधन को और महंगा कर दिया है।
IMF की शर्तों से सरकार पर दबाव
आर्थिक संकट के बीच सरकार पर IMF के साथ हुए समझौतों को पूरा करने का भी दबाव है। ईंधन क्षेत्र में Full Cost Recovery मॉडल लागू करने का मतलब है कि तेल की खरीद से लेकर रिफाइनिंग और परिवहन तक आने वाली लागत की वसूली उपभोक्ताओं से की जाए। इस व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर सरकार के लिए लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखना मुश्किल होता है।
अब रोजाना बदल सकती हैं ईंधन की कीमतें
पहले ईंधन की कीमतों की समीक्षा 15 दिन के अंतराल पर होती थी। लेकिन अब Daily Pricing Mechanism के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों को घरेलू कीमतों में तेजी से शामिल किया जा रहा है। यानी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब पेट्रोल और डीजल खरीदने वाले लोगों पर जल्दी दिखाई दे सकता है।
आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर
पेट्रोल और डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। डीजल की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर सब्जियों, राशन और दूसरी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। लगातार तीन दिनों से जारी बढ़ोतरी ने पहले से महंगाई का सामना कर रहे लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो ईंधन की कीमतों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।

