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मेरठ नीला ड्रम मर्डर केस में मुस्कान-साहिल दोषी करार, 14 अक्टूबर को अगली सुनवाई

Meerut Blue Drum Murder Case: मेरठ के चर्चित ‘ब्लू ड्रम’ मर्डर केस में, जिला जज की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने अभी सजा का ऐलान नहीं किया है। दोनों को दी जाने वाली सजा पर फैसला अभी बाकी है। सरकारी वकील के.के. चौबे ने बताया कि अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया है। 14 अक्टूबर को सजा के संबंध में सुनवाई होगी। उस दिन सजा के बिंदु पर दोनों आरोपियों को सुना जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे सजा को लेकर अपने बारे में कुछ कहना चाहते हैं या नहीं।

के.के. चौबे के अनुसार, कोर्ट ने मुस्कान और साहिल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की और पूछा कि क्या वे अपने बचाव में या सजा के बारे में कुछ कहना चाहते हैं। दोनों ने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने के लिए मानसिक रूप से तैयार लग रहे थे। उन्होंने समझाया कि दोषी ठहराने और सजा सुनाने की प्रक्रिया दो अलग-अलग चरणों में होती है। इसलिए, कोर्ट ने आज दोषी ठहराने का फैसला सुनाया और सजा पर सुनवाई के लिए एक अलग तारीख तय की जाएगी।

इसके अलावा, सौरभ के वकील विजय बहादुर ने कहा कि अभियोजन पक्ष इस मामले में ज्यादा से ज्यादा सजा यानी मौत की सजा की मांग करेगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद अदालत अपनी मर्जी से तय करेगी कि दोनों आरोपियों को क्या सजा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने अदालत को इस मामले में सजा के तौर पर उम्रकैद या मौत की सजा के प्रावधानों के बारे में बता दिया है। अभियोजन पक्ष के वकील के अनुसार, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह के अपराध समाज को प्रभावित करते हैं और सामाजिक ताने-बाने पर असर डालते हैं.

14 अक्टूबर को सजा पर होगी सुनवाई

कोर्ट ने यह भी कहा कि अपराधी और समाज के हितों के बीच संतुलन बनाकर सजा तय करना उसकी जिम्मेदारी है। अभी सजा सुनाने की तारीख तय नहीं हुई है। कोर्ट ने लगभग 15 दिन बाद की तारीख का संकेत दिया है, जिसकी औपचारिक घोषणा बाद में की जाएगी। अगली सुनवाई में सजा के मुद्दे पर दोनों आरोपियों का पक्ष सुना जाएगा, जिसके बाद कोर्ट सजा सुनाएगी।

बता दें, यह मामला 3 मार्च 2025 का है। आरोप है कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ राजपूत का मर्डर कर शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर ऊपर से सीमेंट भरकर सील कर दिया था। करीब 15 दिन बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में केस का ट्रायल शुरू हुआ। पुलिस ने मामले में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इस दौरान 126 तारीखों पर सुनवाई हुई और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लंबी सुनवाई और अंतिम बहस के बाद 19 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

हत्या से कोर्ट में फैसला सुरक्षित होने तक का पूरा घटनाक्रम

सौरभ राजपूत 24 फरवरी, 2025 को लंदन से मेरठ अपने घर लौटे। अगले दिन, 25 फरवरी को उनकी पत्नी मुस्कान ने उनके लौटने की खुशी में घर पर एक पार्टी रखी। कुछ दिनों बाद, 28 फरवरी को परिवार ने अपनी बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया। फिर, 3 मार्च को हालात ऐसे बदले कि पूरी घटनाक्रम एक मर्डर केस में बदल गया। टाइमलाइन के मुताबिक, मुस्कान ने सौरभ के खाने में नींद की गोली मिला दी थी। इसके बाद साहिल शुक्ला को फोन करके बुलाया गया। आरोप है कि सौरभ की हत्या करने के बाद उसके शव के चार टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर दिया गया।

4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी पीहू को अपनी मां के घर छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल चली गई। वह 17 मार्च को हिमाचल से लौटी और अपने माता-पिता के घर पहुंचकर उन्हें घटना के बारे में बताया। 18 मार्च को पुलिस इंदिरा नगर स्थित घर पहुंची, जहां उन्हें एक ड्रम के अंदर सौरभ का शव मिला। इसके बाद पुलिस ने साहिल और मुस्कान को गिरफ्तार कर लिया। 19 मार्च को पुलिस ने साहिल और मुस्कान से एक साथ पूछताछ की। इस दौरान सौरभ के शरीर के कटे हुए चार हिस्सों का पोस्टमार्टम किया गया।

जांच आगे बढ़ी तो सामने आए कई अहम सुराग

12 मई को पुलिस ने 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 34 गवाहों का जिक्र था। पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर केस आगे बढ़ा। 17 जून को मुस्कान और साहिल पर हत्या और सबूत मिटाने के आरोप तय किए गए। इसके बाद ट्रायल शुरू हुआ। 4 जुलाई को सौरभ के भाई बबलू ने कोर्ट में गवाही दी। इसके बाद जुलाई से नवंबर के बीच परिवार, पुलिस, डॉक्टर, डांसर और ड्रम बेचने वाले समेत कई गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किए गए।

ड्रम और दूसरे सामान को बनाया गया सबूत

19 दिसंबर को कोर्ट में एक नीला ड्रम और एक ट्रॉली बैग पेश किया गया। इन्हें मामले में अहम सबूत के तौर पर दिखाया गया। इसके बाद, 23 जनवरी 2026 को Jio के नोडल ऑफिसर ने कोर्ट में एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कॉल रिकॉर्ड, चैट और मोबाइल लोकेशन की जानकारी थी। मुस्कान और साहिल पर लगे आरोपों को लेकर 21 अप्रैल को सुनवाई हुई। दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया—इन अपराधों के लिए 32 साल तक की सजा हो सकती है।

इसके बाद, 22 मई से 17 सितंबर के बीच मामले में अंतिम बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। फैसला मूल रूप से 19 सितंबर को सुनाया जाना था, लेकिन कोर्ट ने 30 सितंबर की नई तारीख तय की। इस तरह, लगभग सात महीनों तक चली जांच, गवाही, सबूत पेश करने और अंतिम बहस के बाद, अब फैसले का इंतजार है। (एजेंसी)

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