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9 संभागों के कॉलेजों का बदला अधिकार क्षेत्र, RGPV का हुआ विभाजन; छात्रों पर क्या होगा असर?

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा सुधार करते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की बैठक में स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार अब प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के विकेंद्रीकरण के लिए तीन अलग-अलग क्षेत्रीय विश्वविद्यालय काम करेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने से तकनीकी और व्यावसायिक संस्थानों का प्रबंधन अधिक पारदर्शी और सुगम होने की उम्मीद है।

तीन संभाग समूहों के लिए तीन नए मुख्यालय

पुनर्गठन के बाद भोपाल स्थित मुख्य परिसर को मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाएगा। वहीं महाकौशल क्षेत्र के संस्थानों की देखरेख के लिए जबलपुर में महाकौशल प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए उज्जैन में मालवा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का मुख्यालय स्थापित किया जाएगा। सरकार ने दोनों नए केंद्रों के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों के गठन को भी हरी झंडी दे दी है।

9 संभागों के इंजीनियरिंग कॉलेजों का हुआ नया बंटवारा

नई व्यवस्था के तहत प्रदेश भर के तकनीकी कॉलेजों को उनके भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर तीनों विश्वविद्यालयों से जोड़ा गया है। भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग के संस्थान मध्य भारत विश्वविद्यालय के अधीन रहेंगे। इंदौर और उज्जैन संभाग के कॉलेज मालवा विश्वविद्यालय से संबद्ध किए गए हैं। इसके अतिरिक्त जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के सभी कॉलेज महाकौशल विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में शामिल किए गए हैं।

अलग कानूनों के जरिए होगा प्रशासनिक संचालन

उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग इन तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए आगामी विधानसभा सत्र में अलग-अलग अधिनियम प्रस्तुत करेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों का विकेंद्रीकरण करना है, जिससे प्रदेश के दूरस्थ जिलों के छात्रों को डिग्री, अंकसूची और अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए भोपाल की दौड़ न लगानी पड़े और स्थानीय स्तर पर ही सभी सुविधाएं मिल सकें।

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