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ममता बैंठी धरने पर: अभिषेक बनर्जी पर हमला बना टर्निंग पॉइंट, क्या होगा सीएम सुवेंदु का एक्शन?

ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सड़क पर उतरकर बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। कोलकाता के ऐतिहासिक रानी रासमणि एवेन्यू में आयोजित इस धरने को पार्टी का एक महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। यह प्रदर्शन तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी शामिल हैं, पर हुए कथित हमलों के विरोध में किया जा रहा है। टीएमसी का आरोप है कि हाल ही में हुई घटनाएं राजनीतिक रूप से प्रेरित थीं और पार्टी नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई।

संविधान की प्रति के साथ मार्च, अंबेडकर को दी श्रद्धांजलि

धरना स्थल पर पहुंचने से पहले ममता बनर्जी ने कोलकाता में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वे हाथ में संविधान की प्रति लेकर मार्च करती नजर आईं, जिससे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था में भी कथित रूप से छेड़छाड़ की गई है।

टीएमसी नेताओं पर हमले का आरोप, पुलिस ने की कार्रवाई

टीएमसी की ओर से दावा किया गया है कि सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के काफिले पर हमला किया गया, जिसमें उन्हें चोटें आईं। इसके अलावा हुगली में सांसद कल्याण बनर्जी पर भी हमले की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोनारपुर क्षेत्र से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन का कहना है कि जांच जारी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

सरकार और प्रशासन की सख्ती, अनुमति को लेकर विवाद

धरने को लेकर प्रशासन और सरकार के बीच भी तनाव देखा गया है। कोलकाता पुलिस ने शुरुआत में रानी रासमणि एवेन्यू पर धरने की अनुमति देने से इनकार किया था और कुछ तैयारियों को भी हटाया गया। सरकार का कहना है कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की भीड़ या प्रदर्शन को कानून व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं बनने दिया जाएगा।

राजनीतिक टकराव और आगे की रणनीति

ममता बनर्जी ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें बंगाल में विरोध की अनुमति नहीं दी गई, तो वे आंदोलन को राष्ट्रीय राजधानी तक ले जा सकती हैं। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है।

वहीं राजनीतिक हलकों में इसे ममता बनर्जी की आक्रामक “सड़क राजनीति” की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी स्थिति को नियंत्रण में रखने की रणनीति पर काम कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तीखी टकराहट पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।

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