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Mamata Banerjee Protest: संविधान हाथ में, सरकार निशाने पर… ममता के धरने ने बंगाल की राजनीति में मचाई हलचल

Mamata Banerjee Protest: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भारी उबाल देखने को मिल रहा है। राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। 15 साल बाद सत्ता से बाहर हुई टीएमसी जहां चुनाव में धांधली और अपने नेताओं पर हो रहे हमलों के आरोप लगा रही है, वहीं पहली बार सरकार बनाने वाली भाजपा पूरे आत्मविश्वास से लबरेज है।

इस आक्रामक सियासी माहौल के बीच, मंगलवार को कोलकाता की सड़कों पर उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद अपने शीर्ष नेताओं के साथ धरने पर बैठ गईं। राजनीतिक विश्लेषक इसे साल 2006 में हुए ऐतिहासिक ‘सिंगुर आंदोलन’ की आहट के रूप में देख रहे हैं।

बिना परमिशन रानी रासमणि एवेन्यू पहुंचीं ममता, वाई सर्किल पर डाला डेरा

मंगलवार को ममता बनर्जी अपने कालीघाट स्थित आवास से निकलने के बाद सीधे कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू पहुंचीं। कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टीएमसी के इस धरने को हरी झंडी नहीं दी थी।

इसके बावजूद, ममता बनर्जी ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने की बात कहते हुए वाई सर्किल पर धरना शुरू कर दिया। इस धरने में उनके साथ सांसद कल्याण बनर्जी, खुद पीड़ित सांसद अभिषेक बनर्जी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता तथा सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हैं।

आंबेडकर को श्रद्धांजलि और हाथ में संविधान की किताब

धरना स्थल पर बैठने से पहले एक बेहद प्रतीकात्मक वाकया देखने को मिला। टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी पार्टी के अन्य नेताओं के साथ भारत रत्न डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा पर पहुंचीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममता बनर्जी अपने हाथ में ‘भारत का संविधान’ (Constitution Book) लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंची थीं। इसके जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य की मौजूदा शुभेंदु सरकार में लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है।

अभिषेक बनर्जी के साथ हुई मारपीट से आक्रोश में टीएमसी

तृणमूल कांग्रेस के इस राष्ट्रव्यापी हल्लाबोल के पीछे की मुख्य वजह पार्टी नेताओं पर हो रहे कथित हमले हैं। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से राज्य में तानाशाही चल रही है।

मुख्य विवाद: हाल ही में सोनारपुर में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। इसके अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई अन्य टीएमसी नेताओं पर भी हमले की घटनाएं सामने आई हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि इस विरोध-प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य विपक्षी नेताओं की सुरक्षा और उन पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज उठाना है।

भाजपा का पलटवार: ‘हथकंडों से नहीं पड़ेगा कोई असर’

दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के इन आरोपों और प्रदर्शन पर कड़ा पलटवार किया है। भाजपा ने सोनारपुर में हुई हिंसा और मारपीट के मामले में उल्टा तृणमूल कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा किया है। भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य ने टीएमसी के धरने पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने टीएमसी को नकार दिया है और अब उनके ऐसे किसी भी राजनीतिक हथकंडे या ड्रामे का भाजपा सरकार और पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

फिलहाल, कोलकाता के वाई सर्किल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है और ममता बनर्जी का यह धरना बंगाल की राजनीति को एक नया मोड़ देता नजर आ रहा है।

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