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JPSC केस में बड़ा खुलासा, 100 से ज्यादा कॉपियों में सेटिंग का आरोप; स्ट्रॉन्ग रूम फर्जीवाड़ा उजागर

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में सामने आए घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। सीआईडी ​​की जांच में इस रैकेट का पर्दाफाश हुआ और दो वन रेंज अधिकारियों, ऋतिक रोशन और पंकज प्रसून को गिरफ्तार किया गया। ये दोनों आरोपी कोचिंग संस्थान संचालक संजीत कुमार के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, परीक्षा केंद्र के स्ट्रांग रूम से उत्तर पुस्तिकाएं निकालकर दिल्ली और लखनऊ से बुलाए गए उत्तरदाताओं द्वारा भरी गईं। 100 से अधिक अभ्यर्थियों से प्रति छात्र लाखों रुपये की वसूली कर फर्जी तरीके से पास कराने का पूरा रैकेट चल रहा था।

स्ट्रॉन्ग रूम से कॉपियां निकालकर बाहर लिखवाने का खेल

आरोपी प्रदीप कुमार सिंह ने स्ट्रांग रूम से 30 उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाएं निकालने की बात कबूल की। ​​जिन उम्मीदवारों को उत्तर नहीं पता थे, उन्हें सांकेतिक उत्तर दिए गए और उन्हें बाहर जाकर अपनी प्रतियां लिखने को कहा गया। खाली ओएमआर शीट भरने के लिए लखनऊ और दिल्ली से विशेष टीमें बुलाई गईं। सीआईडी ​​की जांच में पता चला कि ऋतिक और पंकज प्रसून ने वन रेंज अधिकारी (एफआरओ) की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। दोनों संजीत के एजेंट के रूप में काम करते थे। कई अभ्यर्थियों से संपर्क कर संजीत के जरिए उन्हें लाभ पहुंचाया था। ऋतिक जमशेदपुर के उलीडीह और पंकज रांची में शिवभवन कमलाकांत रोड सुखदेवनगर का है। पंकज और संजीत पड़ोसी भी है।

कोचिंग संचालक के एजेंट के रूप में काम करते थे आरोपी
ऋतिक रोशन और पंकज प्रसून ने संजीत कुमार के जरिए ही एफआरओ की परीक्षा पास की थी।
दोनों आरोपी कई अभ्यर्थियों को जोड़कर संजीत तक पहुंचाने का काम करते थे।
पंकज प्रसून आरोपी संजीत कुमार का पड़ोसी भी है।
पूछताछ में एफआरओ मेन्स के 25 और एसीएफ मेन्स के 15 अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराने की बात सामने आई है।

100 से अधिक अभ्यर्थियों से करोड़ों की वसूली

CID ​​की जांच में खुलासा हुआ कि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा आयोजित करने के नाम पर 100 से अधिक उम्मीदवारों से भारी मात्रा में धनराशि वसूली गई। मुख्य साजिशकर्ता अभय तिवारी और रामबीर सिंह के बयानों के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा में प्रति छात्र 5 लाख रुपये की दर से लगभग 5 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। मुख्य परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों के अंक बढ़ाने के लिए जांचकर्ताओं से संपर्क किया गया था। इसके लिए हजारीबाग व रांची में अलग अलग जगहों पर सॉल्वर गैंग के सदस्यों को बैठाकर उत्तर पुस्तिकाएं लिखवायी गई थीं। इसके लिए संजीत, रवि की मदद से अभ्यर्थियों का जुगाड़ किया गया था।

पीडीएफ एडिटर से बदलाव और सॉल्वर गैंग की मदद

मुख्य परीक्षा में अंक बढ़ाने के लिए हजारीबाग और रांची के विभिन्न स्थानों पर उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर करने वाले गिरोह तैनात किए गए थे। कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में पीडीएफ संपादकों का उपयोग करके बदलाव किया गया था। इसके अलावा, यह भी पता चला है कि सीडीपीओ, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और सिविल सेवा परीक्षाओं में भी हेराफेरी की गई थी। (एजेंसी)

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