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नकली दवाओं पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम, वैक्सीन और एंटीबायोटिक पर QR कोड अनिवार्य

QR Code on Medicine: केंद्र सरकार ने नकली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने वैक्सीन, एंटीबायोटिक्स और कैंसर की दवाओं के लिए QR कोड अनिवार्य कर दिया है। नए नियमों के तहत, जरूरी दवाओं पर QR कोड लगाना जरूरी कर दिया गया है, जिससे एक क्लिक में ही उनके बनने की जगह और तरीके की जानकारी मिल सकेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन की सूचना जारी की है। QR कोड स्कैन करने पर देश में बनी दवाओं की पूरी “बर्थ हिस्ट्री” (उत्पादन से जुड़ी जानकारी) पता चल जाएगी। इस नियम में सभी तरह की वैक्सीन, एंटीबायोटिक्स, कैंसर-रोधी दवाएं और नशा छुड़ाने से जुड़ी ‘शेड्यूल H2’ दवाएं शामिल हैं।

दवा पैकेजिंग पर क्यूआर कोड अनिवार्य

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए इन दवाओं की प्राइमरी पैकेजिंग पर एक कोड मुद्रित या चिपकाना अनिवार्य होगा। अगर दवा की पैकेजिंग पर जगह कम है, तो QR कोड को सेकेंडरी पैकेजिंग पर लगाया जा सकता है। यह डिजिटल कोड ग्राहक, फार्मासिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर समेत किसी भी व्यक्ति को दवाओं की असलियत और पहचान की पुष्टि करने में मदद करेगा।

 

दवा कहां बनी, कैसे बनी और एक्सपायरी डेट भी

दवाओं पर पूरी जानकारी होगी, जिसकी शुरुआत मैन्युफैक्चरिंग की तारीख से होगी।इसमें एक खास पहचान कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, निर्माता कंपनी का विवरण, बैच संख्या, निर्माण और एक्सपायरी डे, निर्माण लाइसेंस संख्या और जहां लागू हो वहां केमिकल फार्मूले का विवरण शामिल होगा। सरकार नकली दवाओं की समस्या को रोकने के लिए अगले जुलाई से इस उपाय को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है, ताकि मरीज उनकी देखभाल करने वाले और अन्य लोग दवा की जानकारी की पुष्टि कर सकें।

नकली दवाओं पर अंकुश

सरकार ने कहा है कि इस कदम का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और दवाओं की आसानी से जांच करना है, ताकि ग्राहक यह पक्का कर सकें कि प्रोडक्ट असली है, न कि नकली या खराब क्वालिटी का। यह उपाय पूरी फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा और सरकार ने नियमों का पालन करने के लिए एक समय-सीमा तय की है।

1 जुलाई 2027 से नए नियम लागू

वैक्सीन, कैंसर की दवाओं और नशीली व साइकोट्रोपिक दवाओं के निर्माताओं को 1 जुलाई, 2027 से लेबलिंग के नए नियमों का पालन करना होगा। एंटीबायोटिक्स समेत एंटीबैक्टीरियल दवाओं के लिए QR कोड का नियम एक साल बाद, 1 जुलाई, 2028 से लागू होगा। यह कदम बाज़ार में नकली दवाओं के आने को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है, क्योंकि इससे मरीज़ों की सुरक्षा और पब्लिक हेल्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।(एजेंसी)

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