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MP राज्यसभा सीट के लिए नामांकन आज से: 116 वोटों का जादुई आंकड़ा, भाजपा की जीत लगभग तय

भोपाल। मध्य प्रदेश से रिक्त हुई एक राज्यसभा सीट के उपचुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही राजनीतिक दलों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। यह सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। मुरुगन अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश कोटे से संसद के उच्च सदन पहुंचे थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। उनके अचानक इस्तीफे के बाद निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।

चुनाव का पूरा कार्यक्रम

निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई समय-सारिणी के अनुसार:

नामांकन की अंतिम तिथि: 2 नवंबर

नामांकन पत्रों की जांच: 3 नवंबर

नाम वापसी की अंतिम तारीख: 5 नवंबर

मतदान एवं मतगणना: 12 नवंबर

यदि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा जाता है, तो नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के साथ ही 5 नवंबर को भाजपा उम्मीदवार का निर्विरोध निर्वाचन तय हो जाएगा।

भाजपा में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त: केंद्रीय या स्थानीय चेहरा?

विधानसभा में प्रचंड बहुमत के चलते भाजपा की जीत तय मानी जा रही है, ऐसे में पार्टी के भीतर टिकट को लेकर जबरदस्त खींचतान है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि पार्टी नेतृत्व इस सीट से केंद्रीय टीम के किसी प्रमुख चेहरे को संसद भेज सकता है।

केंद्रीय चेहरे: संभावित दावेदारों में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम तेजी से उभरा है, जिनका उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और तमिलनाडु भाजपा की वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन के नाम की भी चर्चा है।

प्रदेश स्तर के दावेदार: यदि पार्टी आलाकमान राज्य संगठन को प्राथमिकता देता है, तो राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक आशीष अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, पूर्व उपाध्यक्ष विनोद गोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ और पूर्व मंत्री रंजना बघेल के नाम भी विचारणीय पैनल में शामिल बताए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश राज्यसभा का मौजूदा दलीय समीकरण

मध्य प्रदेश में उच्च सदन यानि राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं।
वर्तमान स्थिति: एल. मुरुगन के इस्तीफे से पहले भाजपा के पास 9 सीटें थीं, जबकि कांग्रेस के पास 2 सीटें हैं। मुरुगन के हटने के बाद भाजपा के सदस्यों की संख्या घटकर 8 रह गई है, जिसे वह इस उपचुनाव में जीतकर पुनः 9 करने की मजबूत स्थिति में है।

विधानसभा का संख्याबल: 116 का जादुई आंकड़ा और वोटिंग गणित

राज्यसभा चुनाव में विधानसभा सदस्यों द्वारा मतदान किया जाता है। 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में एक सीट पर होने वाले उपचुनाव में जीत दर्ज करने के लिए ‘आधे से एक अधिक’ फॉर्मूले के आधार पर कम से कम 116 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी।

हालांकि, इस बार चुनावी गणित 229 विधायकों के मतों से तय होगा। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के चलते कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

इसके अतिरिक्त, बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे का रुख भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सप्रे कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अघोषित रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। हालांकि, तकनीकी रूप से वे अभी भी खुद को कांग्रेस का विधायक बताती हैं। यदि चुनाव में वोटिंग की नौबत आती है, तो निर्मला सप्रे का वोट सत्ताधारी दल भाजपा के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है। संख्याबल के भारी अंतर को देखते हुए कांग्रेस के लिए चुनौती पेश करना बेहद कठिन है, जिससे यह सीट भाजपा की झोली में जाना तय माना जा रहा है।

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