Tue. Sep 29th, 2026

गृहमंत्री के दौरे से पहले साजिश बेनकाब: LPU बवाल पर वायरल वीडियो निकला डीपफेक, साइबर सेल ने शुरू की धरपकड़

जालंधर। पंजाब के जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुए हालिया विवाद को लेकर इंटरनेट मीडिया पर दुष्प्रचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। परिसर में हुए हंगामे के बाद से ही लगातार भ्रामक सामग्री, एडिटेड तस्वीरें और फर्जी दावे वायरल किए जा रहे हैं। इसी क्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से ऐन पहले सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो सामने आने से नया विवाद खड़ा हो गया। इस वीडियो में पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति को कैंपस में हुई अशांति के लिए गृहमंत्री के भतीजे को जिम्मेदार ठहराते हुए दिखाया गया है, जिसके बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

डीएसपी मेजर सिंह के नाम से वायरल हुआ भ्रामक वीडियो

सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर तेजी से शेयर की जा रही इस वीडियो क्लिप में नजर आ रहे व्यक्ति की पहचान पुलिस उपाधीक्षक मेजर सिंह के तौर पर पेश की जा रही है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में हुए हंगामे और तोड़फोड़ के पीछे सीधे तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री के रिश्तेदार का हाथ था। संवेदनशील समय में इस तरह के गंभीर आरोपों वाले वीडियो के सामने आते ही इंटरनेट पर सनसनी फैल गई और असामाजिक तत्वों ने इसे व्यापक स्तर पर प्रसारित करना शुरू कर दिया।

शुरुआती जांच में डीपफेक की पुष्टि, पुलिस ने खारिज किया दावा

मामला संज्ञान में आते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने इस वीडियो की बारीकी से तकनीकी जांच करवाई। प्राथमिक पड़ताल में यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि यह वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक की मदद से तैयार किया गया एक मनगढ़ंत वीडियो है। जांच में सामने आया है कि डीएसपी मेजर सिंह की तरफ से ऐसा कोई भी बयान या आधिकारिक वीडियो जारी नहीं किया गया है। वीडियो में किसी अन्य पुलिस अधिकारी के चेहरे और आवाज के साथ तकनीकी छेड़छाड़ कर जनता को भ्रमित करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश की गई है।

साइबर सेल ने शुरू की पड़ताल, मूल सोर्स की तलाश तेज

एलपीयू में हुए हंगामे के बाद से ही पुलिस प्रशासन इंटरनेट मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फेक न्यूज पर पैनी नजर बनाए हुए है। जालंधर पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने इस फर्जी वीडियो के संबंध में तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस दल अब इस बात का पता लगा रहे हैं कि इस वीडियो को तैयार करने में किस एआई टूल का इस्तेमाल हुआ, इसे सबसे पहले किस इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस या सोशल अकाउंट से पोस्ट किया गया और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है।

भ्रामक सामग्री शेयर करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी

पुलिस प्रशासन ने आम जनता, विद्यार्थियों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी असत्यापित अथवा संदिग्ध वीडियो और संदेश को आगे फॉरवर्ड न करें। अधिकारियों ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था को प्रभावित करने या किसी की सामाजिक छवि खराब करने के इरादे से डिजिटल छेड़छाड़ कर फर्जी सामग्री तैयार करना और उसे वायरल करना गंभीर अपराध है। ऐसे कृत्यों में लिप्त पाए जाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ आईटी अधिनियम और सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

About The Author

इन्हें भी पढ़े