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इंदौर से मुंबई का सफर सिर्फ 8 घंटे में, 309 KM का नया रेल रूट बदलेगा तस्वीर

Indore News: मनमाड रेल लाइन को लेकर एक नया अपडेट आया है। मध्य प्रदेश के जिन जिलों से यह लाइन गुजरेगी, वहां जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। यह रेल लाइन मध्य और पश्चिमी भारत के बीच कनेक्टिविटी के लिए बहुत अहम है और महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश के इलाके के लिए यह एक गेम-चेंजर साबित होगी। यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की मंजूरी और PM गति शक्ति योजना के तहत लागू किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ दोनों राज्यों के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति देगा। यह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों को जोड़ेगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार और तेजी से बढ़ेगा।

मध्य प्रदेश में जमीन अधिग्रहण तेज

मध्य प्रदेश में इंदौर-मनमाड रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम तेजी पकड़ चुका है। रेलवे और वन विभाग के बीच हुए समझौते के बाद, 309 किलोमीटर लंबे इस रेल प्रोजेक्ट के लिए 349.789 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण का काम शुरू हो गया है। इस योजना के तहत, मध्य प्रदेश में 207.3023 हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 142.4867 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित की जानी है, जिससे कुल अधिग्रहित की जाने वाली वन भूमि 349.789 हेक्टेयर हो जाएगी।

मनमाड-इंदौर रेल लाइन से जुड़ेंगे यह जिले – इंदौर, धार, खरगोन, बड़वानी, धुले, नासिक, मनमाड़

इंदौर-मुंबई की दूरी होगी कम

यह रेल लाइन इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी कम कर देगी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर, दोनों शहरों को जोड़ने वाला रेल रूट 200 किलोमीटर छोटा हो जाएगा। छोटा रूट और आधुनिक ट्रैक लगने से यात्रियों के यात्रा के समय में कई घंटों की बड़ी बचत होगी, जिससे उत्तर भारत से दक्षिण और पश्चिम भारत की यात्रा बहुत आसान हो जाएगी। छोटे रूट और आधुनिक ट्रेनों के चलने से यात्रियों के यात्रा के समय में लगभग 4 से 4.5 घंटे की बड़ी बचत होगी। दूसरे शब्दों में, यात्रा में लगने वाले समय की बचत होगी।

एमपी-महाराष्ट्र के लिए अहम

इंदौर-मनमाड रेल लाइन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच रेल कनेक्टिविटी के लिए बहुत जरूरी है। यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के इंदौर को महाराष्ट्र के मनमाड से जोड़ेगा। इस रूट का लगभग 170 किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश में और करीब 139 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में होगा। मध्य प्रदेश सरकार भी इस प्रोजेक्ट में अपना योगदान दे रही है। इस बड़े रेलवे प्रोजेक्ट को 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस रेल लाइन प्रोजेक्ट को 18,036 करोड़ की लागत से मंजूरी दी गई है।

जानिए क्यों खास है यह रेल लाइन?

इंदौर से मुंबई के बीच यात्रा का समय, जो अभी 13 घंटे है, घटकर सिर्फ 9 घंटे रह जाएगा। अभी ट्रेनें रतलाम-वडोदरा रूट से चलती हैं, लेकिन नई लाइन बनने के बाद ट्रेनें सीधे इंदौर से मनमाड होते हुए चल सकेंगी। यह ट्रैक मध्य प्रदेश के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल हब, पीथमपुर को सीधे मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से जोड़ेगा, जिससे दक्षिण भारत और मध्य भारत के बीच कनेक्टिविटी तेज और आसान हो जाएगी। इस रूट पर 2028 और 2029 के बीच ट्रेन सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य है।

34 स्टेशन बनेंगे

इंदौर-मनमाड के बीच 309 किलोमीटर लंबे इस पूरे रूट पर कुल 34 रेलवे स्टेशन होंगे। इसमें लगभग 30 नए स्टेशनों का निर्माण और कुछ मौजूदा स्टेशनों को अपग्रेड करना शामिल है, जिससे लगभग 1,000 गांवों और 30 लाख से ज्यादा आबादी को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। मध्य प्रदेश में यह रूट इंदौर, खरगोन, बड़वानी, पीथमपुर, धर्मपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, जुलवानिया और डॉ. अंबेडकर नगर से होकर गुजरेगा, जबकि महाराष्ट्र के प्रमुख स्टेशनों में नरदाना, धुले और मालेगांव शामिल होंगे।(एजेंसी)

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