Ganesh Visarjan 2026: जानिए अनंत चतुर्दशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, नियम और विसर्जन की संपूर्ण पूजा विधि
Ganesh Visarjan 2026: गणेशोत्सव का महापर्व अपने अंतिम चरण में है और बप्पा को विदा करने का समय आ गया है। इस साल अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन कब है और कौन सा मुहूर्त सबसे उत्तम रहेगा? आइए जानते हैं पूजा-विधि और विसर्जन के जरूरी नियम!
विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित गणेशोत्सव का यह पावन पर्व देश भर में अत्यंत धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर से हुई थी, और अब मुख्य गणेश विसर्जन यानी अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। वहीं, परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन पर बप्पा को विदा करने वाले भक्त अपने निर्धारित दिनों पर भी विसर्जन कर रहे हैं।
गणेश विसर्जन 2026: प्रमुख शुभ मुहूर्त (25 सितंबर)
अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को विदा करने के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें आप विसर्जन कर सकते हैं:
- लाभ (उन्नति) चौघड़िया: सुबह 07:41 से 09:12 तक
- अमृत (उत्तम) चौघड़िया: सुबह 09:12 से 10:42 तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:48 से 12:37 तक
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:13 से 01:43 तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:13 से 03:01 तक
विसर्जन से पहले करें ये जरूरी परंपराएं
गणपति बप्पा की मूर्ति को जल में प्रवाहित करने से पहले ‘उत्तर पूजा’ की जाती है। इस दौरान बप्पा को नए वस्त्र, चंदन, रोली, अक्षत और दूर्वा घास अर्पित की जाती है। इसके साथ ही उन्हें मोदक, लड्डू और फलों का भोग लगाकर सपरिवार आरती की जाती है।
गणेश विसर्जन की सही और सरल पूजा विधि
- अंतिम पूजन: विसर्जन से ठीक पहले बप्पा की विधि-विधान से पूजा करें और उन्हें प्रणाम करें।
- क्षमा प्रार्थना: पूजा या सेवा के दौरान हुई किसी भी भूल या त्रुटि के लिए भगवान गणेश से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।
- दही-चावल का शगुन: विदाई से ठीक पहले गणपति जी की हथेली पर थोड़ा सा दही और कच्चा चावल रखें। ऐसी मान्यता है कि इससे बप्पा अगले वर्ष जल्दी लौटकर आते हैं।
- जयकारा और विसर्जन: “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ श्रद्धापूर्वक मूर्ति को साफ जल में प्रवाहित करें।

