Egg Price Hike: अंडा खाना हुआ भारी! ₹100 के पार पहुंची एक दर्जन की कीमत, जानिए क्यों आसमान छू रहे हैं दाम
Egg Price Hike: प्रोटीन का सबसे सुलभ और अच्छा स्रोत माना जाने वाला अंडा अब आम आदमी की थाली से दूर होता नजर आ रहा है। देश भर के खुदरा बाजारों में अंडे की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी देखने को मिल रही है, जिसने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ हॉस्टल चलाने वालों और मिड-डे मील प्रबंधन की भी चिंता बढ़ा दी है। देश के कई प्रमुख शहरों में एक अंडे की कीमत 8.5 से 9 रुपये प्रति नग तक पहुंच गई है, जिसके चलते अब एक दर्जन अंडे खरीदने के लिए लोगों को ₹100 से अधिक की कीमत चुकानी पड़ रही है।
पोल्ट्री फीड का महंगा होना है सबसे बड़ी वजह
नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, केवल हैदराबाद में ही अंडों की एक्स-फार्म कीमत में एक महीने के भीतर 15% और पिछले साल के मुकाबले लगभग 40% तक का भारी इजाफा हुआ है। पोल्ट्री कंपनियों के अनुसार, मार्च 2026 के बाद से मुर्गियों के चारे (पोल्ट्री फीड) में इस्तेमाल होने वाली हर जरूरी चीज की कीमतों में आग लग गई है। मुर्गियों के दाने में मक्का की हिस्सेदारी लगभग 55% होती है, जो मार्च के बाद से 35% से ज्यादा महंगा हो चुका है। वहीं, 22% हिस्सेदारी रखने वाली सोयाबीन की खली के दाम 64% से अधिक बढ़ चुके हैं। इसके अलावा, विदेशों से आने वाले जरूरी एमिनो एसिड की कीमत मार्च से अब तक करीब 3.5 गुना बढ़ चुकी है।
एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों ने बढ़ाई मुसीबत
अंडे की कीमतें बढ़ने के पीछे सिर्फ पोल्ट्री फीड ही नहीं, बल्कि एक नया बाजार समीकरण भी जिम्मेदार है। दरअसल, अब मक्का की मांग सिर्फ पोल्ट्री उद्योग तक सीमित नहीं रह गई है। एथेनॉल (Ethanol) बनाने वाली कंपनियां सरकार के ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत बड़ी मात्रा में मक्का खरीद रही हैं, जिससे खुले बाजार में मक्के की भारी किल्लत हो गई है और दाम आसमान छू रहे हैं। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे विदेशों से आने वाले फीड इंग्रीडिएंट्स का आयात काफी महंगा हो गया है।
अनियमित मानसून और कम उत्पादन का डबल अटैक
इस साल मौसम की मार ने भी उद्योग की कमर तोड़ दी है। अनियमित मानसून के कारण खरीफ और रबी की फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। वहीं, पिछले साल भारत में सोयाबीन का उत्पादन करीब 20% कम रहा था, जिसने बची-कुची कसर पूरी कर दी। यदि आगे भी मानसून की स्थिति कमजोर रहती है, तो आने वाले दिनों में कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
चिकन के दामों में भी भारी बढ़ोतरी
जून के महीने तक देश के कई हिस्सों में पड़ी भीषण गर्मी का सीधा असर मुर्गियों के उत्पादन पर पड़ा है। अत्यधिक गर्मी के कारण ब्रॉयलर चिकन का उत्पादन बड़े पैमाने पर घट गया, जिससे बाजार में चिकन की सप्लाई कम हो गई है। पोल्ट्री उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय में कई शहरों में चिकन का खुदरा भाव 250 से 260 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे नॉन-वेज लवर्स का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।

