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झारखंड में प्रदर्शन के दौरान टकराव, CM हेमंत सोरेन का पुतला जलाने पर छात्रों से भिड़े JMM समर्थक

Ranchi News: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को रांची, गिरिडीह और हजारीबाग़ में टकराव में बदल गया। इन तीनों जगहों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाने के लिए इकट्ठा हुए छात्रों और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। रांची में हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को बल का इस्तेमाल करना पड़ा। शुक्रवार शाम, रांची के ऐतिहासिक अल्बर्ट एक्का चौक और चडरी तालाब के पास प्रदर्शनकारियों के हाथों से मुख्यमंत्री का पुतला छीन लिया गया।

बताया गया कि चडरी तालाब के पास पहले से मौजूद जेएमएम समर्थकों ने छात्रों के प्रदर्शन का विरोध किया। इसी दौरान छात्रों के हाथ से मुख्यमंत्री का पुतला छीन लिया गया, जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते दोनों ओर से धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। समय तनाव बढ़ गया, जब जेपीएससी रिफॉर्म्स मंच से जुड़े छात्र मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने के लिए अल्बर्ट एक्का चौक की ओर बढ़ रहे थे।

छात्र नेता कुणाल सिंह हिरासत में

पुलिस ने छात्र नेता कुणाल सिंह को हिरासत में ले लिया है। इस बीच, गिरिडीह शहर के पुलिस स्टेशन इलाके में झंडा मैदान में छात्रों और JMM कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। छात्र JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे आंदोलन के तहत मुख्यमंत्री का पुतला जलाने के लिए इकट्ठा हुए थे। JMM नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, जिससे दोनों गुटों के बीच विवाद हुआ और बाद में यह मारपीट में बदल गया। छात्रों ने JMM कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि पुतला जलाने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उन पर हमला किया गया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। बताया जा रहा है कि पूरी घटना CCTV कैमरों में कैद हो गई है; हालांकि, पुलिस या प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

हजारीबाग में भी छात्रों के साथ JMM कार्यकर्ताओं की झड़प

हजारीबाग शहर में छात्रों और JMM कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबर है। छात्रों का कहना है कि वे भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और सरकार के हालिया फैसलों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप है कि सरकार हाई कोर्ट में अपने ही रद्द करने के आदेश का मजबूती से बचाव नहीं कर पाई, जिससे उनमें नाराजगी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 18 अगस्त को 22 भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने, छह की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को जांच के दायरे में रखने का फैसला किया था। इसके बाद 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर और अन्य नियुक्तियों से जुड़े मामलों में अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। (एजेंसी)

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