Sat. Oct 31st, 2026

बीमार मां के पास बैठे अर्जुन मुंडा ने बजाई बांसुरी, मधुर धुन ने जीता लोगों का दिल

जमशेदपुरः झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने जमशेदपुर के घोराबंधा स्थित अपने आवास पर, अपनी बीमार माँ सायरा मुंडा के पास बैठकर उनके लिए बांसुरी बजाई। धुन सुनकर उनकी माँ ने अपना सिर उठाया; अपने बेटे को बांसुरी बजाते देख उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने प्यार से अपने बेटे के सिर पर हाथ रखकर उसे आशीर्वाद दिया। अर्जुन मुंडा ने इस भावपूर्ण पल को सोशल मीडिया पर भी साझा किया।

कहा जाता है कि माँ के पास बैठने के लिए किसी खास वजह की जरूरत नहीं होती—चाहे उनका हाल-चाल जानना हो, उनसे पुरानी कहानिया सुनना हो, या बस उनके पास बैठे रहना हो। कभी-कभी जब इंसान अपने दिल की बात कहना चाहता है, तो शब्द कम पड़ जाते हैं; ऐसे पलों में शायद कोई धुन काम आ सकती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे अपनी बीमार मां के पास बैठे नजर आ रहे हैं। फिर वह बांसुरी उठाते हैं और उसे बजाने लगते हैं। न कोई मंच है, न माइक, न कोई भीड़. बस मां हैं। उनका बेटा है और बांसुरी से निकलते कुछ सुर हैं।

इस छोटे से वीडियो में अर्जुन मुंडा का एक ऐसा रूप सामने आया है, जो आमतौर पर उनकी राजनीतिक छवि के पीछे छिपा रहता है। यहाँ वे पूर्व केंद्रीय मंत्री या भाजपा के वरिष्ठ नेता नहीं हैं; बल्कि वे बस एक बेटे हैं, जो अपनी माँ के पास बैठे हैं और उनके साथ कुछ अनमोल पल बिताना चाहते हैं। वीडियो के साथ, अर्जुन मुंडा ने अपनी माँ के लिए एक भावुक संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने माँ को अपने जीवन का सबसे अनमोल आशीर्वाद बताया। उन्होंने लिखा कि माँ का प्यार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, उनके लिए सहारे का स्तंभ है और उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

जीवन भर में, एक इंसान कई लोगों से मिलता है, अनगिनत तारीफें पाता है और जीवन में कई मुकाम हासिल करता है। फिर भी, कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो बाकी सब चीज़ों से कहीं बढ़कर होते हैं—माँ के साथ का रिश्ता भी ऐसा ही एक बंधन है। जब बच्चा छोटा होता है, तो माँ उसके पास बैठती है, उसे खाना खिलाती है, उसकी परेशानियों को समझती है और रोने पर उसे दिलासा देती है। समय बीतता है, बच्चा बड़ा हो जाता है और जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ अपनी एक अलग दुनिया बना लेता है। लेकिन माँ के लिए, वह हमेशा बस एक बच्चा ही रहता है। फिर जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आता है, जब मां को सहारे की जरूरत पड़ने लगती है। तब वही बच्चे उसके पास बैठते हैं। कभी उसका हाथ पकड़ते हैं। कभी उससे बातें करते हैं और कभी बस उसके साथ चुपचाप वक्त बिताते हैं। अर्जुन मुंडा का यह वीडियो इसी रिश्ते की एक झलक दिखाता है।

राजनीति से अलग दिखा अर्जुन मुंडा का रूप

अर्जुन मुंडा झारखंड की राजनीति से गहराई से जुड़े हुए हैं। वे झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है।

हम अक्सर सार्वजनिक जीवन में लोगों को भाषण देते, सभाओं में शामिल होते, चुनाव प्रचार करते या राजनीतिक मुद्दों पर बयान देते हुए देखते हैं। वे एक सार्वजनिक छवि बना लेते हैं। फिर भी, हर सार्वजनिक चेहरे के पीछे एक निजी जीवन भी होता है—जिसमें परिवार, रिश्ते और अपने करीबियों के प्रति गहरी चिंता शामिल होती है।

यह वीडियो अर्जुन मुंडा की निजी दुनिया की एक झलक दिखाता है। उनकी माँ की तबीयत ठीक नहीं है, और वे उनके पास बैठे हैं—उनके साथ समय बिता रहे हैं और बांसुरी बजा रहे हैं। उस पल उनकी माँ के मन में क्या चल रहा था, यह तो हम नहीं जान सकते, लेकिन वीडियो में कैद यह दृश्य बहुत कुछ कह जाता है।

बांसुरी के सुर और मां के साथ बिताए पल

यह वीडियो लोगों के दिलों को छू लेता है; इसमें कोई दिखावा नहीं है। एक बेटा अपनी मां के पास बैठा है, हाथ में बांसुरी लिए हुए है और ये पल अपनी माँ को समर्पित कर रहा है। जब से यह वीडियो सामने आया है, सोशल मीडिया पर लोग अर्जुन मुंडा के इस भावुक पहलू की तारीफ कर रहे हैं। कई लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, जो माँ और बेटे के बीच के रिश्ते और उनके साथ बिताए गए इन अनमोल पलों को दर्शाती हैं।

सोशल मीडिया पर अक्सर बहस, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयान ही सुर्खियों में छाए रहते हैं। ऐसे माहौल में, एक साधारण सी पारिवारिक तस्वीर भी लोगों का ध्यान खींच लेती है—खासकर तब, जब वह किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन की झलक दिखाती है, जिसे लोग अब तक केवल एक अलग, सार्वजनिक छवि के जरिए ही जानते थे। कोई व्यक्ति चाहे कितना भी मशहूर या सफल क्यों न हो जाए, उसके भीतर का बच्चा हमेशा जिंदा रहता है, खासकर अपनी मां के सामने। कभी-कभी, ऐसे रिश्तों की असल प्रकृति को समझने के लिए बस इतना ही काफी होता है; एक मां के लिए, अपने बेटे का बस उसके पास आकर बैठ जाना ही सब कुछ है, और एक बेटे के लिए, अपनी मां का साथ होना जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद है।(एजेंसी)

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