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दिल्ली-NCR की सुरक्षा के लिए वायुसेना का बड़ा प्लान, सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस ग्रिड बनेगा ढाल

S-400 स्क्वाड्रन को सिर्फ दिल्ली-NCR की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा. यह यूनिट राजधानी की रक्षा के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पश्चिमी या उत्तरी सीमा पर तेजी से भेजी जा सकेगी. दिल्ली-NCR के लिए तय स्क्वाड्रन दोहरी भूमिका निभाएगा. एक तरफ स्थायी सुरक्षा और दूसरी तरफ आपात स्थिति में तेजी से तैनाती.

 

भारतीय वायुसेना देश की हवाई सुरक्षा को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है. इसके तहत 10 स्क्वाड्रन वाला एक बड़ा मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसे सुदर्शन चक्र नाम दिया गया है. इस योजना के तहत एक S-400 स्क्वाड्रन को सिर्फ दिल्ली-NCR की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा. यह यूनिट राजधानी की रक्षा के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पश्चिमी या उत्तरी सीमा पर तेजी से भेजी जा सकेगी.

IAF अब सीमित तैनाती से आगे बढ़कर पूरे देश में फैला हुआ एक मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क बनाने की दिशा में काम कर रही है. दिल्ली-NCR के लिए तय स्क्वाड्रन दोहरी भूमिका निभाएगा. एक तरफ स्थायी सुरक्षा और दूसरी तरफ आपात स्थिति में तेजी से तैनाती.

कहां-कहां होगी तैनाती?

रणनीतिक तौर पर इस मिसाइल ढांचे को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा. पश्चिमी सीमा पर राजस्थान और पंजाब सेक्टर में चार स्क्वाड्रन लगाए जाएंगे, जिससे पाकिस्तान की दिशा में गहरी निगरानी और दूर से ही दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को नष्ट किया जा सकेगा.

वहीं चीन से आने वाले खतरों को ध्यान में रखते हुए पांच स्क्वाड्रन लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किए जाएंगे. खास ध्यान सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर रहेगा, जो रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है. ऊंचाई पर तैनाती से रडार की क्षमता और मारक दूरी दोनों बढ़ेंगी.

भारत को रूस से मिल रहे S-400 सिस्टम इस पूरी योजना की रीढ़ होंगे. चौथा स्क्वाड्रन मई 2026 तक मिलने वाला है, जबकि पांचवां और अंतिम स्क्वाड्रन साल के अंत तक आ जाएगा. इन मिसाइलों की मारक क्षमता करीब 400 किलोमीटर तक है. इस नेटवर्क को पूरा करने में स्वदेशी प्रोजेक्ट कुशा भी अहम भूमिका निभाएगा.

2030 तक पूरा नेटवर्क होगा तैयार

DRDO द्वारा विकसित यह लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली (ERADS) है, जिसकी लागत करीब 21,700 करोड़ रुपये बताई जा रही है. 2026 में इसके M1 इंटरसेप्टर के शुरुआती परीक्षण सफल रहे हैं. सुदर्शन चक्र एक हाइब्रिड एयर डिफेंस सिस्टम होगा, जिसमें S-400 लंबी दूरी के बड़े खतरों को खत्म करेंगे, जबकि प्रोजेक्ट कुशा की स्वदेशी मिसाइलें 150, 250 और 400 किलोमीटर रेंज में अतिरिक्त सुरक्षा परत तैयार करेंगी. अनुमान है कि 2028 से 2030 के बीच यह पूरा नेटवर्क तैयार होकर देश को एक मजबूत और लगभग अभेद्य मिसाइल सुरक्षा कवच देगा.

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