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पाकिस्तान के लाहौर से अभिजीत दीपके को आया भावुक खत, लिखा- ‘हम आपको उम्मीद से देख रहे’

इस्लामाबाद: भारत में अपने पहले ही विरोध-प्रदर्शन में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की सफलता के बाद, पाकिस्तान में भी इसके आंदोलन से काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। पाकिस्तान में इस बात की चर्चा हो रही है कि कैसे युवाओं के नेतृत्व वाले इस आंदोलन ने भारत की मोदी सरकार के एक ताकतवर मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। अब, लाहौर के एक युवक ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेता अभिजीत दिपके को एक दिल को छू लेने वाला खत लिखा है।

लाहौर के रहने वाले एहतेशाम हसन ने ‘स्क्रॉल’ में लिखा: “डियर अभिजीत, मैं आपको लाहौर से लिख रहा हूँ। एक ऐसा शहर जहां की हवा दिल्ली की तरह ही धूल भरी है। मैं यहां एक युवाकार्यकर्ता हूं। उस पीढ़ी का हिस्सा जो बॉर्डर की लंबी और अनिश्चित छाया में पली-बढ़ी है। मैं आपको इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि लंबे समय बाद, बॉर्डर के उस पार से आई खबरें देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे मैं आईने में खुद को देख रहा हूं।”

पाकिस्तानी युवा ने अभिजीत दिपके से क्या अपील की?

खत में आगे कहा गया है, “जब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने युवा, बेरोज़गार लोगों के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया, तो पाकिस्तान में मेरे जानने वाले युवाओं ने तुरंत उस शब्द को पहचान लिया। दक्षिण एशिया के ताकतवर लोग हममें से लाखों लोगों को ठीक इसी नजरिए से देखते हैं।”वे लोग जो ‘फालतू’ समझे जाते हैं बिना नौकरी वाले ग्रेजुएट वे छात्र जिनके सपने लीक हुए एग्जाम पेपर में बिक जाते हैं और वे युवा जिनसे उम्मीद की जाती है कि वे जो कुछ भी थोड़ा-बहुत मिले उसी में शुक्रगुजार रहें।’ उन्होंने आगे लिखा ‘अपने आंदोलन का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रखकर आपने आप पर फेंके गए पत्थर का इस्तेमाल घर बनाने के लिए किया।’

एहतेशाम हसन लिखते हैं, “लाहौर में हमें अक्सर ऐसा लगता है जैसे हम आपके विरोध-प्रदर्शनों के ही एक शांत रूप से जी रहे हों। हमारे संघर्ष एक जैसे हैं। मेडिकल और डेंटल कॉलेज एडमिशन टेस्ट से जुड़ा घोटाले हमें उस संकट की याद दिलाता है जिसका सामना आपको तब करना पड़ा था जब नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का पेपर लीक हो गया था।”हमारे परिवार भी कोचिंग सेंटरों के लिए भारी कर्ज में डूब जाते हैं और हमारी युवा आबादी भी अब एक बोझ बनती जा रही है। लेकिन पाकिस्तान में कभी-कभी माहौल थोड़ा ज्यादा भारी लगता है।’

‘पाकिस्तान में परीक्षा पेपर लीक होना आम बात’

एहतेशाम हसन लिखते हैं, “परीक्षा का पेपर लीक होना एक छोटी सी समस्या है। अगर हम बड़ी तस्वीर देखें, तो हम सभी को एक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे कि बेरोजगारी, गरीबी और खराब जीवन स्तर, जो सीमाओं के पार भी मौजूद हैं। आपका विरोध-प्रदर्शन हममें से लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद और ताजगी भरा है।’
आगे लिखा है, “औपनिवेशिक शासन से मिली सामूहिक आजादी पर विचार करने के लिए अगस्त से बेहतर कोई महीना नहीं हो सकता। 1947 के बंटवारे में हमने लाखों लोगों को खो दिया। लेकिन अगर आजादी के 80 साल बाद भी हममें से लाखों लोगों के पास जीवन की बुनियादी जरूरतें नहीं हैं, तो हमने क्या हासिल किया है?”

‘पाकिस्तान में भारत जैसी नहीं है आजादी’

उन्होंने आगे लिखा, “मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा, लेकिन यहां थोड़ी जलन भी है। ऐसी जलन नहीं जिससे कड़वाहट पैदा हो, बल्कि एक तरह की चाहत है। हम आपके डिजिटल स्पेस को देखते हैं। दो हफ्तों में 22 मिलियन फॉलोअर्स और हम सोचते हैं कि अगर हमारा डिजिटल स्पेस भी इतना बड़ा होता तो हम क्या कर सकते थे।”

आगे खत में लिखा है, “मैं आपके संघर्ष को एक चेतावनी और उम्मीद की किरण, दोनों के तौर पर देखता हूं। चेतावनी यह है कि युवाओं की आवाज दबाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके जैसे इंटरनेट बंद करना, छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज करना और असहमति को देश-विरोधी करार देना पूरे इलाके में एक जैसे ही हैं। फिर भी, उम्मीद आपके साहस और मजबूती से डटे रहने की क्षमता में है। अगर आप दिल्ली में अपनी बात पर अडिग रह सकते हैं, तो इससे लाहौर या कराची के उस छात्र को ताजी हवा का झोंका मिलता है जो घुटन महसूस कर रहा है।” (एजेंसी)

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