जेनेवा में फ्लैट, विदेशी बैंक खाते और पत्नी की संपत्ति… हरदीप पुरी के हलफनामे पर कांग्रेस ने क्यों उठाए सवाल?
भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पत्र पर कानूनी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस विधायक और उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दिन रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष लिखित शिकायत पेश करते हुए पुरी के हलफनामे में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि शपथ पत्र में कई संपत्तियों और अनिवार्य जानकारियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
विदेशी परिसंपत्तियों और नोटरीकरण पर सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि अटेर से विधायक हेमंत कटारे ने रिटर्निंग ऑफिसर को जो आपत्तियां सौंपी हैं, उनमें सबसे अहम मुद्दा प्रत्याशी की पत्नी की संपत्ति और नाम का विवरण न होना है। इसके अतिरिक्त, जेनेवा स्थित आवासीय अपार्टमेंट और विदेशी बैंक खातों में जमा परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि हलफनामे के साथ संलग्न नोटरी प्रक्रिया भी वैधानिक मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे नामांकन की वैधता संदिग्ध हो जाती है।
पारदर्शिता के दावों पर जीतू पटवारी का प्रहार
मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सत्ताधारी दल की शुचिता और पारदर्शिता के दावों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मर्यादाओं की दुहाई देने वाली भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उच्च सदन के लिए प्रस्तावित उनके उम्मीदवार के चुनावी शपथ पत्र में इतनी बुनियादी खामियां कैसे रह गईं। पटवारी ने चुनाव आयोग से इन सभी बिंदुओं पर गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की है ताकि चुनावी नियमों की निष्पक्षता बनी रहे।
चुनाव कार्यक्रम और नामांकन की स्थिति
गौरतलब है कि यह राज्यसभा सीट केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी। इसके लिए भाजपा ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था और उन्होंने 31 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किया था। चुनाव आयोग की समय-सारणी के अनुसार नामांकन की अंतिम तारीख 2 नवंबर थी और 3 नवंबर को जांच का दिन तय था। 5 नवंबर तक नाम वापस लिए जा सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर 12 नवंबर को मतदान होना है। स्क्रूटनी के दौरान सामने आई इन आपत्तियों पर रिटर्निंग ऑफिसर के आगामी फैसले पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

