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US मिडटर्म चुनाव: क्या ट्रंप के दो साल बाद बदल जाएगा संसद का गणित? दांव पर सीनेट और हाउस

वॉशिंगटन। अमेरिकी लोकतंत्र में सत्ता संतुलन की दिशा तय करने वाले बहुप्रतीक्षित मिडटर्म चुनावों का दौर शुरू हो चुका है। राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे सफर यानी दो साल बाद होने वाले ये चुनाव अमेरिकी संसद की दशा और दिशा तय करते हैं। इस चुनाव के नतीजों से यह तय होगा कि आने वाले दो वर्षों में कांग्रेस के दोनों सदनों सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में किस दल का दबदबा रहेगा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने शेष कार्यकाल में विधायी नीतियों को लागू करने में कितनी सहूलियत या बाधा मिलेगी।

गिरती रेटिंग और ट्रंप प्रशासन के सामने मुश्किलें

इस बार के मिडटर्म चुनावों में सबसे बड़ा केंद्र बिंदु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कामकाज को लेकर जनता का रुख है। आम तौर पर रिपब्लिकन पार्टी का चुनावी प्रदर्शन ट्रंप की व्यक्तिगत लोकप्रियता और उनके समर्थकों की लामबंदी से गति पकड़ता रहा है, लेकिन हालिया जनमत आंकड़े पार्टी के लिए दबाव का संकेत दे रहे हैं। विभिन्न सर्वेक्षणों में राष्ट्रपति ट्रंप की कार्यप्रणाली को स्वीकार करने वाले लोगों की दर लगभग 39 फीसदी पर आ टिकी है, जबकि 61 फीसदी लोग प्रशासन की नीतियों से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं।

रोजमर्रा की महंगाई और अंतरराष्ट्रीय तनाव बने मुख्य चुनावी मुद्दे

अमेरिकी मतदाताओं के बीच रोजमर्रा की बढ़ती लागत और हेल्थकेयर के भारी-भरकम खर्चे सबसे बड़े घरेलू मुद्दे बनकर उभरे हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर उपजे तनाव और संघर्ष की स्थिति के चलते ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से डीजल और ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि ने मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इन आर्थिक चिंताओं के कारण उपजी सत्ता-विरोधी लहर का सीधा खामियाजा रिपब्लिकन पार्टी को भुगतना पड़ सकता है, जिससे प्रतिनिधि सभा में उसका बहुमत फिसलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

क्या ‘ब्लू वेव’ के सहारे संसद के दोनों सदनों को जीत पाएंगे डेमोक्रेट्स?

ओपिनियन पोल्स और चुनावी सर्वेक्षण डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में एक मजबूत लहर यानी ‘ब्लू वेव’ की ओर इशारा कर रहे हैं। कई चुनावी मॉडल्स में डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में 250 सीटों तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे वे आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सकते हैं। वहीं सीनेट में भी मुकाबला पहले से ज्यादा खुला नजर आ रहा है, जहां पहले 50 या 51 सीटों की बात हो रही थी, अब कुछ अनुमानों में पार्टी 53 से 54 सीटों के मजबूत आंकड़े तक पहुंचती दिखाई दे रही है।

पोल्स की सीमाएं और दोनों पार्टियों की अंतिम बिसात

तमाम सकारात्मक सर्वेक्षणों के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी 2016 के सबक को ध्यान में रखकर बेहद सतर्क है। अमेरिकी चुनावी इतिहास गवाह रहा है कि कंजर्वेटिव और रिपब्लिकन वोटर अक्सर फोन सर्वे या प्री-पोल डेटा में खुलकर राय जाहिर करने से बचते हैं, जबकि डेमोक्रेटिक समर्थक ऐसे सर्वे में मुखरता से भाग लेते हैं।

ऐसे में डेमोक्रेट्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अनुकूल सर्वे पर भरोसा करने के बजाय अपने समर्थकों को असल मतदान के दिन भारी संख्या में पोलिंग बूथों तक लाने की होगी। दूसरी तरफ, रिपब्लिकन पार्टी अपने मूल मतदाताओं, कारोबारी स्वतंत्रता और ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडे को आगे रखकर अंतिम क्षणों तक संसद में अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखने की जुगत में लगी है।

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