GST अधिकारी के पास 3.78 करोड़ की संपत्ति! लोकायुक्त की छापेमारी में जमीन, फ्लैट और लग्जरी गाड़ियों के दस्तावेज मिले
जबलपुर। मध्य प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग में पदस्थ एक जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ा शिकंजा कसा है। दमोह जिले में तैनात जीएसटी अधिकारी मनीष कुमार जैन के जबलपुर और भोपाल स्थित रिहायशी ठिकानों पर मंगलवार सुबह लोकायुक्त की टीमों ने एक साथ दस्तक दी। शुरुआती तलाशी और वित्तीय विश्लेषण में ही अधिकारी के पास ज्ञात वैध आय से 264 प्रतिशत अधिक परिसंपत्तियां मिलने की पुष्टि हुई है। सेवाकाल के दौरान करीब 1.03 करोड़ रुपये की अनुमानित वैध आय की तुलना में अधिकारी ने 3.78 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियां खड़ी कर रखी थीं।
जबलपुर से लेकर भोपाल और सागर तक प्रॉपर्टी का जाल
लोकायुक्त की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए अधिकारी ने अपने और परिजनों के नाम पर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों में जमकर निवेश किया। जब्ती और तलाशी के दौरान जबलपुर, भोपाल और सागर जिले में आवासीय मकान, लग्जरी फ्लैट्स, बेशकीमती जमीनें, चार पहिया वाहन और भारी-भरकम रकम वाली इंश्योरेंस पॉलिसियों के दस्तावेज हाथ लगे हैं। जांच अधिकारी इन तमाम परिसंपत्तियों के खरीद मूल्य और वर्तमान बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए राजस्व व पंजीयन दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं।
पुख्ता इनपुट के बाद भ्रष्टाचार निवारण कानून में केस दर्ज
यह पूरी कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले को मिली एक गोपनीय शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया द्वारा गोपनीय तौर पर संपत्तियों और आय के स्रोतों का सत्यापन कराया गया। शिकायत में लगाए गए आरोपों के सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी अधिकारी मनीष कुमार जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित) की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू की।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तीन टीमों की पड़ताल जारी
लोकायुक्त पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख के दिशा-निर्देशन और पुलिस उपमहानिरीक्षक मनोज सिंह के सुपरविजन में यह सर्च ऑपरेशन संचालित किया जा रहा है। जांच एजेंसी की तीन अलग-अलग टीमें एक साथ अधिकारी के संबंधित ठिकानों पर मौजूद रहकर कंप्यूटर हार्ड डिस्क, बैंक पासबुक और प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात खंगाल रही हैं। लोकायुक्त सूत्रों का कहना है कि बैंक खातों, निजी लॉकरों और बेनामी निवेशों की विस्तृत पड़ताल के बाद अनुपातहीन संपत्ति के कुल आंकड़े में और बड़ा इजाफा होने के पूरे आसार हैं।

