CEC को टिकट और मंत्री पद देने वाले सवाल न उठाएं: पीयूष गोयल ने कांग्रेस को याद दिलाया इतिहास
नई दिल्ली। चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। गोयल ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग का कामकाज हमेशा निष्पक्ष रहा है और उसने सदैव ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाई है।
‘कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दफ्तर का स्तर गिराया’
पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, लेकिन अपने कार्यकाल के ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती है। उन्होंने कहा कि देश कांग्रेस का यह बचकाना रवैया देख रहा है। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में दो मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल बनाया, एक को केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री बनाया और एक को पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक बार मुख्य चुनाव आयुक्त के यह कहने पर भी कि उनके अधीन काम करने वाला इलेक्शन कमिश्नर कांग्रेस एजेंट की तरह काम कर रहा है, उसे पद से हटाने से इनकार कर दिया गया था।
टीएन शेषन और एमएस गिल का उदाहरण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस कभी टीएन शेषन की ईमानदारी का गुणगान करती थी, लेकिन 1999 में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा दिया गया। इसी तरह, एमएस गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और 2000 में सिटिंग पद पर रहते हुए उन्हें पद्म विभूषण दिया गया। इसके बाद वे रिटायरमेंट के तीन साल बाद कांग्रेस में शामिल हुए, 2004 में राज्यसभा पहुंचे और 2008 में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनाए गए। गोयल ने सवाल किया कि क्या यह अधिकारियों को उपकृत करने और संस्था का दुरुपयोग करने का सीधा प्रमाण नहीं है।
केरल के अधिकारियों पर उठाए सवाल
पीयूष गोयल ने कहा कि केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर रहे टीकाराम मीणा को एक वर्ष बाद कांग्रेस की राजस्थान मेनिफेस्टो टीम में शामिल कर लिया गया। वहीं मई 2026 में केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर रहे रतन यू केलकर को चुनाव के तुरंत बाद मौजूदा मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने अपना मुख्य सचिव घोषित कर दिया। गोयल ने आरोप लगाया कि यह चुनाव में मदद के बदले पद देने और राजनीतिक रोटियां सेकने का स्पष्ट उदाहरण है।
एनडीए शासन में चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता
पीयूष गोयल ने कहा कि पहले की सरकारों में इलेक्शन कमिश्नर का चयन सीधे सरकार अपनी पसंद से करती थी और जिसे चाहती उसे चीफ बना देती थी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को देशहित और जनहित में स्वतंत्र रूप से काम करने की पूरी स्वायत्तता दी है और किसी अधिकारी को राजनीतिक लाभ देने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2023 में कानूनी प्रावधान करके नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति का सदस्य बनाया, जिसके बाद अब प्रधानमंत्री के साथ मिलकर नेता प्रतिपक्ष भी मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन तय करते हैं।

