कागजों की बाजीगरी पड़ी भारी: सरकारी जमीन पर चढ़ाया अपना और पत्नी का नाम, जांच बैठते ही पटवारी निलंबित
खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के राजस्व महकमे से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सरकारी जमीन को अपनी ‘जागीर’ समझकर कागजों में हेरफेर करने वाले पटवारी पर प्रशासन का कड़ा डंडा चला है। ग्राम कोलगांव में बेशकीमती शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी कर अपने और अपनी पत्नी के नाम 51 पट्टे दर्ज करने के गंभीर आरोप में तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
कागजों में हेरफेर: सरकारी जमीन पर चढ़ा दिया पति-पत्नी का नाम
मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम कोलगांव की शासकीय भूमि के अधिकार अभिलेख की जांच की गई। प्राथमिक जांच में सामने आया कि तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई ने अपने पद का अनुचित लाभ उठाते हुए सरकारी जमीन के 51 पट्टों के रिकॉर्ड में कथित तौर पर अपना और अपनी पत्नी मनीषा मंडलोई का नाम दर्ज कर लिया था। इस बड़े खेल की भनक लगते ही पूरे प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई।
विपक्ष के हंगामे के बाद कलेक्टर ने बैठाई थी जांच
इस फर्जीवाड़े को सबसे पहले विपक्षी दल कांग्रेस ने उजागर किया था। पार्टी ने सीधे आरोप लगाए थे कि पटवारी ने राजस्व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने परिवार के नाम करोड़ों की सरकारी जमीन के पट्टे चढ़ा लिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने तुरंत संज्ञान लिया और अपर कलेक्टर को मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
नायब तहसीलदार की रिपोर्ट पर एसडीएम का एक्शन
कलेक्टर के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने कोलगांव के राजस्व रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की, जिसमें पट्टों में बड़े स्तर पर अनियमितता की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट हाथ में आते ही खंडवा एसडीएम ऋषि सिंघई ने देर न करते हुए त्वरित एक्शन लिया।
एसडीएम ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम-9 के तहत तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय खंडवा नियत किया गया है। प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि इस खेल में क्या अन्य राजस्व कर्मियों की भी मिलीभगत थी।

