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गणेश विसर्जन पर पंचक का साया! जानें कब होगी बप्पा की विदाई और शुभ मुहूर्त

Ganesh Visarjan 2026: दस दिनों तक अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाने वाला गणेशोत्सव अब अपने अंतिम और सबसे भावुक चरण में पहुंच गया है। इस वर्ष, बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश, जिनकी प्रतिमा 14 सितंबर, 2026 को घरों और पंडालों में स्थापित की गई थी, को अब 25 सितंबर, 2026 (अनंत चतुर्दशी) के शुभ दिन विदाई दी जाएगी।

लेकिन इस बार, विसर्जन की तारीख नजदीक आने के साथ ही, सोशल मीडिया और आम जनता के बीच इस बात को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि क्या इस वर्ष पंचक का प्रभाव गणेश विसर्जन पर पड़ेगा। ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के आधार पर, आइए विस्तार से जानें कि इस वर्ष पंचक कब शुरू होगा और इसका बप्पा के विसर्जन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। गणेश विसर्जन और पंचक काल की मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:

पंचक आरंभ: 23 सितंबर 2026 (बुधवार) की रात 09:57 बजे से
गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी): 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार)
पंचक समाप्त: 28 सितंबर 2026 (सोमवार) को सुबह 10:16 बजे

क्या पंचक काल में गणेश विसर्जन करना वर्जित है?

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा के धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करने की पांच दिवसीय अवधि को पंचक कहा जाता है। इस अवधि के दौरान, निर्माण कार्य, लकड़ी की वस्तुओं की खरीद या दाह संस्कार जैसे कुछ कार्य निषिद्ध होते हैं।

धार्मिक जानकारों का मत

ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार, पंचक काल के सामान्य नियम शुभ या उत्सवपूर्ण आयोजनों पर पूरी तरह लागू नहीं होते। गणेश विसर्जन एक शाश्वत और सार्वभौमिक धार्मिक अनुष्ठान है, जिसे निर्धारित तिथि अनंत चतुर्दशी को ही संपन्न करना चाहिए। इसलिए, पंचक काल के प्रभाव के बावजूद, भगवान गणेश को निर्धारित विधि से विसर्जन करना पूर्णतः वैध, शुभ और फलदायी है। इस संबंध में किसी प्रकार का संदेह करने की आवश्यकता नहीं है।

विसर्जन के दौरान किन बातों का रखें विशेष ध्यान?

अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को विदाई देते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों और धार्मिक परंपराओं का पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है।

शुभ चौघड़िया मुहूर्त का चयन: हालांकि विसर्जन दिन भर किया जा सकता है, लेकिन यदि संभव हो तो राहुकाल से बचते हुए, मूर्ति का विसर्जन केवल सुबह, दोपहर या शाम के शुभ चौघड़िया मुहूर्त में ही करें।

अंतिम पूजा एवं भोग: घर से विदा होने से पहले, बप्पा के लिए षोडशोपचार पूजा (छह प्रकार की विधि) करें, जिसमें उन्हें मोदक, लड्डू, फल और दूर्वा अर्पित करें। आरती करें और क्षमा मांगें। परिवार के सभी सदस्य हाथ जोड़कर एक साथ इकट्ठा हों, अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें और जयजयकार के साथ उन्हें विदाई दें।

यदि संभव हो तो, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने के लिए, पर्यावरण के अनुकूल (शादु मिट्टी की) मूर्ति को घर पर ही किसी बड़े बर्तन या बाल्टी में विसर्जित करें। (एजेंसी)

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