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उत्तर प्रदेश की सियासत में फिर भूचाल…

Uttar Pradesh Ki Siyasat Mein Phir Bhuchaal

 



उत्तर प्रदेश की सियासत में फिर भूचाल

राज्य विभाजन का मुद्दा फिर गरमाया, ओमप्रकाश राजभर का बयान सियासी पारा चढ़ाया

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चुनाव से पहले
विधानसभा चुनाव के मुहाने पर सियासी घमासान

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राजभर का दावा
PM मोदी ने जातिगत जनगणना के बाद विभाजन का आश्वासन दिया

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2012 की घोषणा
मायावती ने 4 राज्यों में विभाजन की थी घोषणा

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राजनीतिक विश्लेषण



ब्रेकिंग न्यूज़
सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश की सियासत में फिर भूचाल

राज्य विभाजन का मुद्दा फिर गरमाया, ओमप्रकाश राजभर का बयान सियासी पारा चढ़ाया

विधान सभा चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है। इस बार इसके जनक बन रहे हैं उत्तर प्रदेश में सूबे की सत्ता के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, जिनके हालिया बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने देश की राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले राज्य उत्तरप्रदेश को चार राज्यों में विभाजित करने की घोषणा की थी। जिसका समूचे उत्तर प्रदेश में विरोध हुआ था और जिसके कारण बसपा सरकार की विधानसभा चुनाव में हार हुई थी।

“राजभर जी का कहना है कि प्रधान मंत्री जी ने उन्हें जातिगत जनगणना के बाद राज्य के विभाजन का आश्वासन दिया है।”

मायावती सरकार की सत्ता से बिदाई के बाद प्रदेश के विभाजन का मुद्दा भी लगभग समाप्त हो गया था लेकिन अब 14 बरस बीतने के बाद फिर राज्य विभाजन का मुद्दा उठने लगा है। श्री राजभर के बयान के मुताबिक़ उन्हें प्रधान मंत्री श्री मोदी जी ने यह आश्वासन दिया है।

राजभर के बयान में कितनी सच्चाई है यह तो वे ही जानते हैं लेकिन इस मुद्दे में प्रधान मंत्री का नाम लेकर उन्होंने मुद्दे को तूल दिया है। यदि सच में ऐसा है तो आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य और केन्द्र की भाजपा सरकार और भाजपा पार्टी दोनों को ही अपना रूख स्पष्ट करना होगा क्योंकि इस मुद्दे पर प्रदेश की जनता में भी सहमति नहीं है।

मायावती जी के पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध और पश्चिम प्रदेश में विभाजन के पक्ष में तो उस समय भाजपा भी नहीं थी। लेकिन तब से लेकर अब तक गंगा, यमुना और गोमती में काफ़ी पानी बह चुका है, अब देश-प्रदेश की राजनीति में भी आमूल चूल परिवर्तन हो चुका है। इसलिए इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में हलचल होना स्वाभाविक है।

प्रदेश की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियां को इस मुद्दे पर अपनी राय रखनी होगी और जनता की राय जानना होगी अन्यथा आने वाले चुनाव में जनता की भावनाओं के विपरीत निर्णय लेने से पूरे प्रदेश की राजनैतिक रूप से परिपक्व जनता फिर से एक बार वोट के माध्यम से अपना निर्णय देगी। राजभर के बयान में प्रधान मंत्री जी के नाम के आने से जानता इसे गंभीरता से ले रही है।

: प्रवीण शुक्ला
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