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सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में TATA की एंट्री, 2028 तक D2D सर्विस शुरू करने की तैयारी

TATA : Starlink और Jio जैसी कंपनियों के बाद, प्रतिष्ठित भारतीय कंपनी टाटा भी अब सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में कदम रख रही है। खबरों के मुताबिक, टाटा समूह की सहायक कंपनी नेल्को 2028 तक देश में अपनी डायरेक्ट टू डिवाइस (D2D) सैटेलाइट सेवा शुरू करने वाली है। इसके अलावा, कंपनी इस साल के अंत तक परीक्षण शुरू करने की योजना बना रही है और भारत के अलावा बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे बाजारों में भी सैटेलाइट सेवाएं लाने की तैयारी कर रही है। डायरेक्ट टु डिवाइस सर्विस का मतलब उस इंटरनेट से है, जो किसी डिवाइस में सीधे अंतरिक्ष से आए सिग्नलों से चलेगा। पूरी दुनिया में इस समय 6G से भी ज्यादा जोर D2D सर्विस पर है। स्टारलिंक ने अमेरिका में इस सर्विस को अभी शुरू किया है।

Jio, Starlink के बाद और एक विकल्प

भारत में अभी तक सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू नहीं हुई हैं। एलन मस्क की स्टारलिंक, मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली जियो और एयरटेल समर्थित वनवेब सहित कई कंपनियों ने मंजूरी के लिए आवेदन किया है। टाटा की नेल्को के प्रवेश से इस श्रेणी का और विस्तार होने की उम्मीद है, जिससे सैटेलाइट इंटरनेट के एक नए विकल्प की आशा बढ़ गई है।

D2D में होगी Nelco की एंट्री

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, Nelco के प्रबंध निदेशक और CEO PJ Nath ने कहा कि कंपनी का निवेश केवल किसी अन्य कंपनी की सेवाओं को पुन: बेचने के लिए नहीं है। Nelco इस उभरते D2D इकोसिस्टम में एक रणनीतिक भागीदार बनना चाहती है। कंपनी के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क के अतिरिक्त सैटेलाइट कनेक्टिविटी का उपयोग आईओटी, स्मार्ट फार्मिंग, कार्गो ट्रैकिंग, कनेक्टेड व्हीकल्स और समुद्री सेवाओं के लिए किया जा सकता है।उनका का मानना है कि अगले 7 से 10 साल में D2D कनेक्टिविटी सैटेलाइट कम्युनिकेशन इकोसिस्टम का बड़ा हिस्सा बन सकती है। हालांकि, ये इन्वेस्टमेंट Nelco की Eutelsat OneWeb के साथ मौजूदा पार्टनरशिप से अलग है। OneWeb के साथ Nelco का काम LEO सैटेलाइट कनेक्टिविटी और रीसेलर मॉडल पर फोक्स्ड है।

शुरुआती बाजार का हिस्सा बनना चाहती है Nelco

Nelco की योजना भारत को D2D सेवाओं के लिए शुरुआती बाजारों में शामिल करने की है। कंपनी 2027 के अंत तक परीक्षण शुरू करने की योजना बना रही है, और वाणिज्यिक सेवा 2028 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, पूर्ण कार्यान्वयन भारत में विकसित नियामक ढांचे पर निर्भर करेगा। Nelco ग्राहकों को सीधे सेवाएं प्रदान करने के बजाय मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है। कंपनी का D2D मॉडल मुख्य रूप से B2B और B2G होगा। कंपनी का कहना है कि मोबाइल टेलीकॉम कंपनियों के लिए हर जगह मोबाइल टावर लगाकर नेटवर्क पहुंचाना संभव नहीं है। ऐसे इलाकों में सैटेलाइट कनेक्टिविटी मौजूदा मोबाइल नेटवर्क के ऊपर एक अतिरिक्त लेयर के तौर पर काम कर सकती है।

लाइसेंस और स्पेक्ट्रम सबसे बड़ी चुनौती

Nelco की योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती रेगुलेशन और स्पेक्ट्रम से जुड़े नियम हैं. टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने D2D सर्विस के लिए मोबाइल सैटेलाइट सर्विस यानी MSS स्पेक्ट्रम और IMT या मोबाइल स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल को लेकर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं. D2D तकनीक अलग-अलग स्पेक्ट्रम बैंड पर काम कर सकती है. अगर IMT स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल होता है तो सैटेलाइट कंपनियों को मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ पार्टनरशिप करनी पड़ सकती है. Nelco का कहना है कि वह रेगुलेटरी अप्रूवल से पहले ही तैयारी कर रही है, ताकि बाजार खुलने के बाद तेजी से सर्विस शुरू की जा सके.

Direct-to-Device सर्विस क्या है?

Direct-to-Device यानी D2D एक सैटेलाइट तकनीक है जो समर्थित स्मार्टफोन और अन्य उपकरणों को सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट करने की सुविधा देती है। इससे अलग से सैटेलाइट डिश या विशेष डोंगल की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। आमतौर पर, फोन कॉल करने, संदेश भेजने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए पास के मोबाइल टावर से कनेक्ट होते हैं। मोबाइल टावर इसके बाद फोन को टेलीकॉम नेटवर्क से जोड़ता है। लेकिन अगर किसी इलाके में मोबाइल टावर नहीं है तो D2D तकनीक की मदद से फोन सीधे ऊपर मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकता है। इसके जरिए इंटरनेट, मैसेज और दूसरी सपोर्टेड सर्विस का इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या आपका फोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकता है?

जी हां, लेकिन हर स्मार्टफोन ऐसा नहीं कर सकता। फोन को संबंधित D2D सेवा के साथ संगत होना चाहिए। इसके अलावा, सैटेलाइट ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनी को भी कनेक्शन का समर्थन करना चाहिए। सिर्फ इसलिए कि कोई Starlink सैटेलाइट आपके ऊपर से गुजर रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि आपका स्मार्टफोन उससे अपने आप कनेक्ट हो जाएगा।

क्या D2D सिर्फ स्मार्टफोन के लिए है?

नहीं। D2D का उपयोग IoT उपकरणों, सेंसरों और ट्रैकर्स के लिए भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी दूरस्थ क्षेत्र में स्थित IoT सेंसर सामान्य मोबाइल नेटवर्क के बिना भी उपग्रह के माध्यम से जानकारी प्रसारित कर सकता है। इसका उपयोग स्मार्ट कृषि, वन निगरानी, ​​कार्गो ट्रैकिंग, कनेक्टेड वाहनों और समुद्री सेवाओं में भी किया जा सकता है। (एजेंसी)

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