त्योहारी सीजन से पहले मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, चीनी की जमाखोरी पर लगी 15 दिन की सीमा
Sugar Price HIKE: त्योहारी सीजन से पहले, मोदी सरकार ने चीनी की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए कमर कस ली है और कड़े कदम उठाए हैं। चीनी के भंडारण पर सख्त रुख अपनाते हुए, केंद्र सरकार ने एक सीमा निर्धारित की है और स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल 15 दिनों के लिए ही चीनी का भंडारण किया जा सकता है। यह आदेश 1 सितंबर से प्रभावी होगा। जो व्यापारी प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का व्यापार करते हैं, वे अब इस नई सीमा से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेंगे।
गौरतलब है कि 1 अगस्त को सरकार ने चीनी डीलरों के लिए 30 दिन की स्टॉक सीमा तय की थी, जिसे अब घटाकर 15 दिन कर दिया गया है। ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार त्योहारी मौसम और लगातार बढ़ती चीनी की कीमतों के कारण जमाखोरी को रोकने के लिए कदम उठा रही है। थोक खरीदारों के लिए चीनी की यह स्टॉक सीमा कम कर दी गई है।
30 नवंबर तक लागू
नई सीमा के अनुसार, थोक व्यापारी और डीलर जो प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं, वे अब 15 दिनों से अधिक समय तक स्टॉक नहीं रख सकेंगे। 1 सितंबर से प्रभावी यह नया नियम 30 नवंबर, 2026 तक लागू रहेगा। इसके दायरे में कन्फेक्शनरी, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और मिठाई विक्रेता शामिल हैं।
सरकार की रहेगी पैनी नजर
चीनी के भंडार की सीमा में इस बदलाव के साथ, सरकार व्यापारियों पर कड़ी निगरानी रखेगी और पिछले वर्ष की औसत मासिक खपत सहित विभिन्न मानदंडों के आधार पर उनकी पहचान करेगी। चीनी मिलों से थोक उपभोक्ताओं को, चाहे सीधे या डीलरों के माध्यम से, की जाने वाली बिक्री पर भी नजर रखी जाएगी। बिक्री और खपत का सत्यापन जीएसटी रिटर्न और चीनी के एचएसएन कोड के आधार पर किया जाएगा।
चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
त्योहारी मौसम से पहले केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त और नवंबर में चीनी की मांग में भारी वृद्धि होती है और हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। महज एक महीने में चीनी की खुदरा कीमत में लगभग 13-14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चीनी के भंडार की सीमा में इस बदलाव का सरकार का उद्देश्य जमाखोरी को रोकना, उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है। यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक और स्थानीय निकाय इस आदेश से मुक्त रहेंगे।(एजेंसी)

