Sun. Oct 4th, 2026

Javed Akhtar On Muslims: जावेद अख्तर ने मुस्लिमों को लेकर दिया बड़ा बयान, बोले- ‘हिंदू अपनी कमियों पर खुलकर बोलते हैं, लेकिन…’

Javed Akhtar on Muslims: मशहूर गीतकार, लेखक और अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाने वाले जावेद अख्तर हाल ही में अपने एक इंटरव्यू को लेकर चर्चा में आ गए हैं। रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को अपना 81वां जन्मदिन मनाने वाले जावेद अख्तर ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के सामाजिक मुद्दों पर बात करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि समाज की आलोचना और सुधार के मामले में दोनों समुदायों के रवैये में काफी अंतर है।

‘हिंदू अपनी कमियों पर बोलते हैं, लेकिन मुसलमान नहीं’

द इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने कहा, “ये जो लोग हैं जैसे आरफा खानम शेरवानी, मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और बाकी… जब बात हिंदू समाज की किसी बुराई या सामाजिक बुराई की होती है, तो ये पूरे जोर से बोलते हैं। आवाज बहुत ऊंची हो जाती है। लेकिन जैसे ही सवाल अपनी कम्युनिटी की तरफ मुड़ता है… अपने समाज में जो समस्याएं हैं… तो आंखें बंद हो जाती हैं और चुप्पी छा जाती है।”

उन्होंने आगे कहा कि हिंदू समाज में कई लोग अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों की आलोचना खुद करते हैं और नास्तिक या स्वतंत्र सोच वाले लोग कट्टरपंथी समूहों का विरोध भी निडरता से करते हैं। इसके विपरीत, मुस्लिम समाज में अपनी कम्युनिटी के अंदर की बुराइयों पर खुलकर बोलने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है।

‘पहले अपनी कौम की सच्चाई बताऊंगा’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए जावेद अख्तर ने कहा, “मैं नास्तिक हूं, लेकिन यह भी एक फैक्ट है कि मैं मुस्लिम कम्युनिटी में पैदा हुआ, तो मेरा फर्ज सबसे पहले अपनी कम्युनिटी की खराबी दिखाने का बनता है। हिंदुस्तान में बहुत से हिंदू हैं जो अपनी चीजों पर लड़ते हैं, लेकिन कितने मुसलमान हैं जो इनसे लड़ते हैं? ‘हमारा तो सब ठीक है, सब बढ़िया’- ऐसा नहीं चलेगा।”

शबाना आजमी ने शेयर किया इमोशनल पोस्ट

अपने जन्मदिन के मौके पर जावेद अख्तर को उनकी पत्नी और अभिनेत्री शबाना आजमी ने सोशल मीडिया पर बेहद खास अंदाज में विश किया। शबाना आजमी ने इंस्टाग्राम पर जावेद की जवानी के दिनों की एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए उनके संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे 19 साल की उम्र में 4 अक्टूबर 1964 को जावेद अख्तर अपनी जेब में सिर्फ 27 ‘नए पैसे’ लेकर बॉम्बे सेंट्रल पहुंचे थे और उन्होंने जिंदगी बनाने के लिए रेलवे स्टेशनों व फुटपाथों पर रातें काटी थीं।

About The Author

इन्हें भी पढ़े