Thu. Jul 16th, 2026

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी, इमरान मसूद ने कोर्ट से लगाई गुहार

Uttar Pradesh News: सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को गिराने के प्रशासनिक आदेश की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों के भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा।उन्होंने सरकार के इस कदम को पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया। सांसद का तर्क था कि अगर यूनिवर्सिटी की इमारतों के ब्लूप्रिंट मंजूर नहीं हुए थे, तो इस मामले को इमारतों को गिराने के बजाय कानूनी तरीकों जैसे कि कंपाउंडिंग प्रक्रिया से सुलझाया जाना चाहिए था। उन्होंने इस गंभीर मामले में न्यायिक दखल की मांग की।

शिक्षा के मंदिर को निशाना बनाना गलत

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ‘शिक्षा के मंदिर’ पर बुलडोजर चलाना, वहां पढ़ने वाले हज़ारों यहां तक कि लाखों छात्रों और युवाओं का भविष्य बर्बाद करने जैसा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर सरकार को आजम खान से कोई राजनीतिक रंजिश थी या वह उन्हें बागी मानती थी, तो इसके लिए उन्हें पहले ही जेल भेजा जा चुका है। हालांकि, राजनीतिक मतभेदों के कारण इतने बड़े और अहम शिक्षण संस्थान को निशाना बनाना किसी भी नजरिए से सही नहीं ठहराया जा सकता।

कंपाउंडिंग समेत कई कानूनी रास्ते मौजूद

प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए इमरान मसूद ने कहा कि अगर यूनिवर्सिटी की कोई इमारत मंजूर किए गए प्लान के मुताबिक नहीं भी बनी थी, तो भी सरकार के पास इस मामले को सुलझाने के लिए कई कानूनी रास्ते थे, जैसे कि कंपाउंडिंग की प्रक्रिया। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार को आजम खान के यूनिवर्सिटी चलाने पर कोई आपत्ति या दिक्कत थी, तो वह अपने अधिकारियों के जरिए संस्थान का कामकाज अपने हाथ में ले सकती थी, लेकिन यूनिवर्सिटी को ही नहीं गिराया जाना चाहिए था।

इसे सिर्फ मुसलमानों का मुद्दा न माना जाए

सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि इस शानदार यूनिवर्सिटी को बनाने में बरसों की कड़ी मेहनत और लगन लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद शिक्षा को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं। इसलिए, शिक्षा के ऐसे अहम केंद्रों को बचाना बहुत जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि सिर्फ इसलिए चुप न रहें क्योंकि यह मामला मुसलमानों से जुड़ा है। यह किसी एक समुदाय का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो देश के युवाओं के भविष्य पर सीधा असर डालता है।

कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की गुहार

मसूद ने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करने का मतलब असल में पूरे संस्थान को हमेशा के लिए खत्म करना है। ऐसा कदम किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए, उन्होंने देश की न्यायपालिका खासकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले में दखल दें, खुद संज्ञान लें और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करें। (एजेंसी)

 

About The Author