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राजस्थान को बड़ी सौगात: पीएम मोदी कल पचपदरा रिफाइनरी और नए एयरपोर्ट टर्मिनल का करेंगे उद्घाटन

बालोतरा: 4 जुलाई का दिन राजस्थान के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल मरुधरा की धरती पर करीब 80,हजार करोड़ रुपये की दो विशाल परियोजनाओं का अनावरण करेंगे। इस भव्य आयोजन के माध्यम से पीएम मोदी न केवल विकास का नया मानक स्थापित करेंगे, ल्कि जनता के बीच जमकर वाहवाही भी लूटेंगे।

प्रधानमंत्री शनिवार को सुबह 11:45 बजे जोधपुर पहुंचेंगे और सबसे पहले बहुप्रतीक्षित नए एयरपोर्ट टर्मिनल का रिमोट से बटन दबाकर लोकार्पण करेंगे, जो क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना “उड़ान-2” की शुरुआत का प्रतीक है। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से रवाना होकर बालोतरा के पचपदरा में स्थित देश के सबसे आधुनिक तेल कुएं, एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे। आइए जानते हैं इन दोनों परियोजनाओं में ऐसी क्या खास बात है, जिनसे भारत वैश्विक बाजार में अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार है।

जब दुनिया में थमेगा उत्पादन, तब थार से बहेगा ‘काला सोना’

राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी ऐसे समय में चालू हो रही है जब वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। पश्चिमी देश अपनी शोधन क्षमता कम कर रहे हैं, वहीं चीन के शानडोंग प्रांत में छोटे पैमाने पर उत्पादन करने वाली कंपनियां करों और कम मुनाफे के कारण अपनी 5 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली संयंत्रों को बंद करने के खतरे का सामना कर रही हैं। इस वैश्विक संकट के बीच, पचपदरा की 90 लाख टन प्रति वर्ष शोधन और 24 लाख टन प्रति वर्ष पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता वैश्विक बाजार में भारत की एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थिति को और मजबूत करेगी।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, करीब 79,459 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह ग्रीनफील्ड रिफाइनरी देश में पिछले 10 साल में स्थापित पहली रिफाइनरी-कम-कॉम्प्लेक्स है। इससे पहले 2016 में पारादीप रिफाइनरी शुरू हुई थी।
इस रिफाइनरी ने पिछले 12 जून से ही कच्चे तेल को प्रोसेस करना शुरू कर दिया है। इसके सीडीयू/वीडीयू से नैफ्था और एलपीजी का उत्पादन भी शुरू हो चुका है, जबकि अन्य ब्लॉक कमिशनिंग के एडवांस स्टेज में हैं।
इस रिफाइनरी को बनाने में जो सामग्री लगी है, उसके आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं।
एफिल टावर से 40 गुना ज्यादा (लगभग 3 लाख मीट्रिक टन) स्टील लगा।
दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा से 5 गुना ज्यादा (16 लाख घन मीटर) कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ।
मिस्र के गिजा के पिरामिडों से 6 गुना ज्यादा (1.5 करोड़ घन मीटर) मिट्टी खोदी गई।
इसमें 28,000 किलोमीटर लंबी केबल बिछाई गई है, जो पूरी पृथ्वी के दो चक्कर लगा सकती है। वहीं इसका 125 मीटर ऊंचा ‘कोक डोम’ बीजापुर के गोल गुंबज से तीन गुना बड़ा है।

जोधपुर का नया टर्मिनल: राजपूताना विरासत और मॉडर्न डिजाइन का संगम

प्रशंसा मिलने का एक और प्रमुख कारण जोधपुर का नया हवाई अड्डा टर्मिनल है, जिसे 400 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और यह 2.52,लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। टर्मिनल का डिजाइन मारवाड़ के शाही इतिहास और आधुनिक विमानन प्रौद्योगिकी का अनूठा मिश्रण है। इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर राजस्थानी किलों की तर्ज पर बना एक भव्य नक्काशीदार गुंबद है, जिसके ऊपर कमल के आधार पर एक कलश स्थापित है। इसके भीतर 6 हाई-टेक एयरोब्रिज बनाए गए हैं। साथ ही, जोधपुर की भीषण गर्मी से निपटने के लिए इसे ‘क्लाइमेट-रिस्पॉन्सिव’ ग्लास से बनाया गया है, ताकि अंदर सूरज की तपिश न पहुंचे और एयर कंडीशनिंग पर लोड कम रहे। यह टर्मिनल अब सालाना 20 लाख यात्रियों को संभालने के लिए तैयार है। (एजेंसी)

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