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पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं? विदेश मंत्रालय के बयान पर विपक्ष का हमला

विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट को केवल ट्रैवल डॉक्यूमेंट बताने वाले बयान पर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा।

 

विदेश मंत्रालय (MEA) के उस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें कहा गया कि पासपोर्ट नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं, बल्कि एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि यदि पासपोर्ट और वोटर आईडी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो नागरिकता साबित करने के लिए आखिर कौन सा दस्तावेज मान्य माना जाएगा।

 

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज उपयोग किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को किसी नागरिक की नागरिकता पर संदेह हो जाए, तो उसे मतदान के अधिकार से भी वंचित किया जा सकता है।

 

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो आज भारतीय नागरिकता का एकमात्र प्रमाण भाजपा का समर्थक और हिंदू होना रह गया है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस और विभिन्न एजेंसियों द्वारा विस्तृत सत्यापन किया जाता है, तो फिर इसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा है।

 

कांग्रेस की केरल इकाई ने भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आधार, पैन, वोटर आईडी और पासपोर्ट भी नागरिकता साबित नहीं करते, तो आम नागरिकों के लिए स्थिति और अधिक भ्रमित करने वाली हो सकती है।

 

विदेश मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि पासपोर्ट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। नए चिप-आधारित ई-पासपोर्ट में बायोमेट्रिक सुरक्षा सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिससे धोखाधड़ी की आशंका कम हो और वैश्विक स्तर पर इसकी विश्वसनीयता बढ़े। मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट जारी करने से पहले कई सरकारी एजेंसियों द्वारा दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन किया जाता है, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता।

 

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट विदेशों में भारतीय नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करने का कार्य करता है, जबकि नागरिकता निर्धारण और उससे जुड़े कानूनी प्रावधान अलग कानूनों और प्रक्रियाओं के तहत संचालित होते हैं। हालांकि विपक्ष का कहना है कि सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि नागरिकता साबित करने के लिए कौन से दस्तावेज निर्णायक माने जाएंगे।

 

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