Sat. Jun 20th, 2026

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, अब हर ऊंची इमारत में होगा फायर सेफ्टी ऑफिसर

CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने बहु-मंजिला इमारतों के लिए आग से सुरक्षा के नए नियम लागू किए हैं। अब 15 मीटर से ज़्यादा ऊंची सभी रिहायशी और कमर्शियल इमारतों में ‘फायर सेफ्टी ऑफिसर’ (आग से सुरक्षा अधिकारी) नियुक्त करना जरूरी है। इन नए नियमों के तहत सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। लापरवाही या नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित इमारत को सील भी किया जा सकता है। सरकार ने आग लगने की घटनाओं को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।

क्यों लाई गई नई फायर सेफ्टी गाइडलाइन?

सरकार ने राज्य में बढ़ते शहरीकरण और लगातार बन रही ऊंची इमारतों को देखते हुए यह फ़ैसला लिया है। बहुमंजिला इमारतों में आग जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सुरक्षा के बेहतर उपाय जरूरी हैं। नई गाइडलाइंस राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के आधार पर तैयार की गई हैं। इनका मुख्य मकसद आग लगने की घटनाओं को रोकना और आपातकालीन स्थितियों में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सुनिश्चित करना है।

अब हर बड़ी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी अफसर की जिम्मेदारी

नई गाइडलाइंस के अनुसार 15 मीटर से ज़्यादा ऊंची इमारतों के लिए फायर सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त करना जरूरी होगा। यह ऑफिसर इमारत के सुरक्षा उपकरणों की जांच करेगा और समय-समय पर मॉक ड्रिल करवाएगा। फायर सेफ्टी ऑफिसर की यह जिम्म्मेदारी होगी कि वह यह पक्का करे कि आग से सुरक्षा के सभी उपाय ठीक से काम कर रहे हों और नियमों का पालन किया जा रहा हो।

नियम तोड़े तो सील होगी बिल्डिंग

सरकार ने आग से सुरक्षा के नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली किसी भी इमारत के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही के मामलों में इमारत को सील किया जा सकता है। साथ ही इमारत का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। सुरक्षा उपायों को बनाए रखने की जिम्मेदारी इमारत के मालिकों, हाउसिंग सोसायटियों और कॉलोनाइजरों को सौंपी गई है।

बिल्डिंग में कौन-कौन से इंतजाम जरूरी?

नई गाइडलाइंस के तहत, बड़ी और बहुमंजिला इमारतों के लिए कई फायर सेफ्टी उपाय अनिवार्य कर दिए गए हैं। फायर डिटेक्शन सिस्टम, फायर अलार्म सिस्टम, इंटरनल हाइड्रेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम और पोर्टेबल फायर एक्सटिंग्विशर लगाना जरूरी होगा। इसके अलावा, इमरजेंसी लाइट, एग्जिट साइन, पानी की पर्याप्त व्यवस्था और इलेक्ट्रिक व डीज़ल फायर पंप जैसी सुविधाएं भी होनी चाहिए। सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि इन सभी सेफ्टी डिवाइस का नियमित निरीक्षण और समय-समय पर रखरखाव किया जाए ताकि इमरजेंसी के समय कोई समस्या न हो।

ऊंचाई के आधार पर इमारतों का वर्गीकरण: सरकार ने इमारतों को उनकी ऊंचाई के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा है।

15 मीटर तक के भवन

ऐसी इमारतों में अग्निशामक यंत्र और सुरक्षित निकासी मार्ग होना जरूरी होगा।

15 से 35 मीटर तक के भवन

इन इमारतों में फायर अलार्म सिस्टम और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य होगा।

35 से 60 मीटर तक के भवन

ऐसे भवनों में स्प्रिंकलर सिस्टम जरूरी होगा। साथ ही हर 15वीं मंजिल पर रिफ्यूज एरिया बनाना होगा, जहां आपात स्थिति में लोग सुरक्षित रह सकें।

60 मीटर से ज्यादा ऊंचे भवन

अति ऊंची इमारतों में फुल फायर सप्रेशन सिस्टम और अलग कंट्रोल रूम बनाना अनिवार्य होगा। कंट्रोल रूम से पूरी बिल्डिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी।

नई गाइडलाइन में आपात स्थिति के लिए लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है।

आग लगने पर लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करना होगा।
बाहर निकलने के लिए सीढ़ियों का उपयोग करना होगा।
बुजुर्गों और दिव्यांगों को पहले सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना होगा।
बिल्डिंग से बाहर निकलने के बाद तय असेंबली पॉइंट पर पहुंचना होगा।
तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना देनी होगी।
सुरक्षा उपकरणों की जांच भी होगी जरूरी
सरकार ने सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। फायर अलार्म और एक्सटिंग्विशर की हर महीने जांच करनी होगी, जबकि सालाना सर्विसिंग जरूरी होगी। फायर पंप की साप्ताहिक जांच और हाइड्रेंट सिस्टम की तीन महीने में टेस्टिंग करनी होगी।

भवन मालिकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

नई गाइडलाइंस के बाद, बिल्डिंग मालिकों और सोसायटियों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। अब न सिर्फ उपकरण लगाना जरूरी है, बल्कि उन्हें चालू हालत में रखना भी अनिवार्य है। सरकार ने सभी नगर निगमों और नगर परिषदों के अधिकारियों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

 

About The Author