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भारत का अपना Satellite Network बनाएगा Jio, Starlink-Kuiper को सीधी चुनौती

Satellite Network

देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में शामिल रिलायंस जियो अब डिजिटल कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह भारत का अपना लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक तेज इंटरनेट पहुंचाना है, जहां फाइबर नेटवर्क और मोबाइल टावरों की पहुंच अभी भी सीमित है।

दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ने पर रहेगा फोकस

रिलायंस जियो के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक में कहा कि जियो ने फाइबर और 5जी नेटवर्क के जरिए देश के बड़े हिस्से को कनेक्ट किया है। अब कंपनी का लक्ष्य उन गांवों, सीमावर्ती इलाकों और द्वीपीय क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाना है, जहां पारंपरिक नेटवर्क स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है। सैटेलाइट आधारित इंटरनेट इन क्षेत्रों के लिए प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।

दो चरणों में आगे बढ़ेगी परियोजना

कंपनी इस महत्वाकांक्षी योजना को दो स्तरों पर आगे बढ़ाएगी। शुरुआती चरण में वैश्विक सैटेलाइट ऑपरेटरों की क्षमता का उपयोग कर सेवाएं शुरू करने की तैयारी है। वहीं दीर्घकालिक रणनीति के तहत भारत में ही स्वतंत्र सैटेलाइट इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्राउंड स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों में आवश्यक तकनीकी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

भारत में बनेंगे अत्याधुनिक ग्राउंड स्टेशन

जियो अपने सैटेलाइट नेटवर्क को समर्थन देने के लिए देशभर में आधुनिक ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। ये स्टेशन उपग्रहों और जमीनी नेटवर्क के बीच डेटा संचार की महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे। कंपनी का मानना है कि इससे इंटरनेट सेवाओं की पहुंच और विश्वसनीयता दोनों में सुधार होगा।

वैश्विक कंपनियों को मिलेगी चुनौती

जियो की यह पहल अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का अपना सैटेलाइट नेटवर्क विकसित होने से डिजिटल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में देश को अंतरिक्ष आधारित संचार सेवाओं के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

लॉन्च टाइमलाइन पर जल्द होगा फैसला

फिलहाल यह परियोजना योजना और मूल्यांकन के चरण में है। कंपनी आने वाले समय में इसकी लागत, तकनीकी संरचना और लॉन्च से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा कर सकती है। माना जा रहा है कि यह पहल भारत के डिजिटल भविष्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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