G7 मंच से ट्रंप की ईरान को चेतावनी, बोले- बात नहीं बनी तो फिर बरसाएंगे बम
वॉशिंगटन: ईरान के साथ चल रही बातचीत के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शांति समझौते को लेकर कड़ा संकेत दिया है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के साथ मौजूदा समझौता मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अगर वह समझौते से असहमत होते हैं, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का सहारा ले सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत के बाद एक बहुत मजबूत समझौता हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसका अंतिम स्वरूप क्या होगा, यह अभी तक किसी को पूरी तरह से पता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर लोग इस समझौते से खुश हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते का विकल्प वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और मंदी हो सकता है। कुछ लोग दुनिया में मंदी देखना चाहते हैं।
ट्रम्प ने कहा कि जो लोग दुनिया में मंदी देखना चाहते हैं, वे बेवकूफ हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्थिरता के महत्व को नहीं समझते। उन्होंने यह भी कहा, “पहली बात, जलडमरूमध्य कभी नहीं खुलेगा।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस समुद्री मार्ग की ओर था। इसके अलावा, ट्रम्प ने ईरान में अनुमानित 300 अरब डॉलर के एक बड़े अमेरिकी निवेश को अस्वीकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह से झूठी हैं। अमेरिका इस समझौते के तहत 300 अरब डॉलर का निवेश नहीं कर रहा है। ईरान के साथ बातचीत की स्थिति स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि मौजूदा समझौता ज्ञापन को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर अंतिम समझौता उन्हें पसंद नहीं आया तो अमेरिका युद्ध की ओर लौट सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा।
जी7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है। एक तरफ अमेरिका समझौते की संभावना को खुला रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ यह संदेश भी दिया जा रहा है कि वो अपने प्रतिनिधिमंडल से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ हुई इस बैठक में साफ कर दिया गया है कि ईरान पर अमेरिकी नीति अभी भी राजनयिक और दबाव के दोहरे फॉर्मूले पर बढ़ रही है। (एजेंसी)

