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सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता पर सियासत गरम, कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

दवाओं की गुणवत्ता पर सियासत गरम

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि अस्पतालों में वितरित की जा रही कुछ दवाओं की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

दवा आपूर्ति व्यवस्था पर उठे प्रश्न

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ समय में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सरकारी अस्पतालों को सप्लाई की गई दवाओं को बाद में गुणवत्ता परीक्षण में मानक के अनुरूप नहीं पाया गया। उनका आरोप है कि जब तक संबंधित दवाओं को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होती है, तब तक बड़ी संख्या में मरीज उनका उपयोग कर चुके होते हैं।

अस्पतालों से भी मिलीं शिकायतें

पार्टी ने दावा किया है कि कई स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ ने दवाओं की प्रभावशीलता और गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की है। मरीजों में प्रतिकूल लक्षण दिखाई देने के बाद दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इन शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

भंडारण व्यवस्था पर भी चिंता

ज्ञापन में दवाओं के रखरखाव और स्टोरेज व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि कई बार दवाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित नहीं रखा जाता, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों की भी जांच किए जाने की आवश्यकता बताई गई है।

स्वतंत्र जांच की मांग

पार्टी ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। साथ ही सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में सप्लाई की जा रही दवाओं की गुणवत्ता का व्यापक ऑडिट कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

मरीजों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

कांग्रेस का कहना है कि सरकारी अस्पतालों पर बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद मरीज निर्भर रहते हैं। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता गंभीर विषय है। पार्टी ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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