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Battery Less Device: कमाल हो गया! वैज्ञानिकों ने बनाई बिना बैटरी वाली अनोखी डिवाइस, अब सिर्फ धूप ‘खाकर’ चार्ज होंगे आपके गैजेट्स

Battery Less Device: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि बिना बिजली, बिना बैटरी और बिना किसी चार्जर के आपका स्मार्टफोन या घर के अन्य डिवाइस चार्ज हो जाएं? जापानी वैज्ञानिकों ने ‘कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण’ (Artificial Photosynthesis) तकनीक से एक ऐसा जादुई डिवाइस तैयार किया है, जो पौधों की तरह धूप से सीधे एनर्जी सोखकर क्लीन फ्यूल बना सकता है। बिजली के भारी-भरकम बिल और बार-बार बैटरी बदलने के झंझट को हमेशा के लिए खत्म करने वाली इस अद्भुत तकनीक की पूरी इनसाइड स्टोरी जानने के लिए पूरा आर्टिकल जरूर पढ़ें।

विज्ञान की दुनिया में तहलका: बिना बैटरी के बनेगा ईंधन

भविष्य की तकनीक अब हकीकत बनने जा रही है। जापान की ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनोखा ‘आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस’ (कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण) सिस्टम विकसित किया है, जो बिना किसी बैटरी, कंप्यूटर या कनवर्टर के लगातार सूरज की रोशनी से क्लीन फ्यूल यानी ‘सोलर फ्यूल’ बना सकता है।

यह तकनीक आने वाले समय में हमारे घरों की बिजली पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है और गैजेट्स को चार्ज करने का तरीका हमेशा के लिए बदल सकती है।

कैसे काम करती है यह ‘आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस’ टेक्नोलॉजी?

यह तकनीक ठीक उसी तरह काम करती है जैसे पेड़-पौधे सूरज की रोशनी का इस्तेमाल करके अपना भोजन (Energy) बनाते हैं।

प्रोसेस: यह सिस्टम धूप की मदद से पानी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO 2) गैस को क्लीन फ्यूल या एनर्जी में बदल देता है।

फॉर्मिक एसिड का निर्माण: इस प्रक्रिया से ‘फॉर्मिक एसिड’ (Formic Acid) नाम का एक केमिकल बनता है, जो एनर्जी और फ्यूल को स्टोर करने का एक बेहतरीन जरिया है।

इलेक्ट्रोलाइज़र का रोल: इस सिस्टम के केंद्र में एक इलेक्ट्रोलाइज़र (Electrolymzer) होता है, जो सोलर सेल्स से मिलने वाली बिजली को केमिकल एनर्जी (फॉर्मिक एसिड) में कनवर्ट कर देता है।

ट्रेडिशनल सिस्टम की छुट्टी: MPPT की समस्या का निकाला तोड़

दिनभर सूरज की रोशनी एक जैसी नहीं रहती, कभी तेज धूप होती है तो कभी बादल छा जाते हैं। इस उतार-चढ़ाव के बीच मशीन लगातार काम करती रहे, इसके लिए पारंपरिक सिस्टम MPPT (Maximum Power Point Tracking) तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन पुराने MPPT सेटअप को वोल्टेज और करंट एडजस्ट करने के लिए भारी-भरकम बैटरी और महंगे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की जरूरत होती थी, जिससे लागत और मशीन की जटिलता दोनों बढ़ जाती थीं।

क्यों नहीं होती इसमें बैटरी की जरूरत?

एसोसिएट प्रोफेसर यासुओ मात्सुबारा और प्रोफेसर युताका अमाओ की टीम ने ‘इडा ग्रुप होल्डिंग्स कंपनी लिमिटेड’ के साथ मिलकर इस इलेक्ट्रोलाइज़र को पूरी तरह री-डिजाइन कर दिया है।

सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट: इसमें एक खास तरह का सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट इस्तेमाल किया गया है, जो बिना किसी बाहरी कंप्यूटर या बैटरी के खुद-ब-खुद MPPT फंक्शन (वोल्टेज एडजस्टमेंट) कर लेता है।

धूप के हिसाब से खुद को ढालना: प्रोफेसर अमाओ ने बताया कि जैसे-जैसे सूरज की रोशनी बढ़ती है, इलेक्ट्रोलाइज़र गर्म हो जाता है। इस गर्मी से डिवाइस का इलेक्ट्रिकल रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) कम हो जाता है, जिससे बिजली आसानी से बहने लगती है। यानी यह मशीन अपनी खुद की गर्मी और बिजली की क्षमता से धूप के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लेती है।

भविष्य में घर के डिवाइस होंगे चार्ज

प्रोफेसर मात्सुबारा के मुताबिक, इस सिस्टम का एक छोटा मॉडल (डायोरामा) सफलतापूर्वक चलाकर देखा जा चुका है, जिसने पर्याप्त मात्रा में फॉर्मिक एसिड (ईंधन) बनाया। यह इस बात का सबूत है कि यह तकनीक पूरी तरह व्यावहारिक है।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर घरों में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे बिना बिजली के केवल धूप की मदद से लोग अपने स्मार्टफोन, गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को सीधे चार्ज कर सकेंगे।

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