छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष पद पर सस्पेंस! 12 जुलाई को खत्म हो रहा दीपक बैज का कार्यकाल, सिंहदेव ने कहा- एक-दो हफ्ते में होगा साफ
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 12 जुलाई को पूरा होने जा रहा है, जिसके बाद संगठन में संभावित बदलाव को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
प्रदेश अध्यक्ष के संभावित बदलाव को लेकर पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि कई राज्यों में संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले एक-दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। सिंहदेव ने यह भी संकेत दिया कि आगामी प्रशिक्षण शिविर से पहले किसी बड़े फैसले की संभावना कम है।
सिंहदेव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि पार्टी आलाकमान उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपता है, तो वे इसे स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि सबको साथ लेकर चलना उनकी प्राथमिकता होगी और संगठन में भेदभाव कम से कम रहेगा।
वहीं, प्रदेश अध्यक्ष पद पर बदलाव की चर्चाओं के बीच मौजूदा पीसीसी चीफ दीपक बैज ने इसे महज अटकलें बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें केवल मीडिया में चल रही हैं और प्रदेश अध्यक्ष का फैसला पूरी तरह पार्टी आलाकमान के अधिकार क्षेत्र का विषय है।
बैज ने दावा किया कि वर्तमान में पार्टी बेहतर तरीके से काम कर रही है और हाल ही में हुए चार नगर पंचायत चुनावों में से दो में कांग्रेस की जीत इसका प्रमाण है। दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता का भरोसा धीरे-धीरे भाजपा से उठता जा रहा है और कांग्रेस के प्रति लोगों का विश्वास फिर से बढ़ रहा है।
इधर, कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस को “डूबती हुई नाव” बताते हुए कहा कि पार्टी में सत्ता लोलुपता की राजनीति चरम पर पहुंच गई है। चौधरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता आपसी खींचतान में उलझे हुए हैं और एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले टीएस सिंहदेव की दावेदारी पर दीपक बैज ने कहा था कि सिंहदेव वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें दिल्ली जाकर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के लिए काम करना चाहिए, जबकि प्रदेश संगठन में युवाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
पीसीसी अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब सभी की निगाहें कांग्रेस आलाकमान के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर तस्वीर और साफ होने की संभावना जताई जा रही है।

