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गर्भवती महिलाओं के उपयोग वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सहित 4 दवाएं अमानक, कई बैच पर रोक

4 दवाएं अमानक

खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की हालिया जांच में गर्भवती महिलाओं के लेबर पेन बढ़ाने में इस्तेमाल होने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन समेत सर्दी-बुखार और दर्द में उपयोग की जाने वाली चार दवाएं मानक गुणवत्ता पर खरी नहीं पाई गई हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित बैचों के उपयोग और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

कोटा मामले के बाद जांच तेज, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर सवाल

राजस्थान के कोटा में हाल ही में पांच प्रसूताओं की मौत के बाद ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को जांच के दायरे में लिया गया था। जांच में इस इंजेक्शन के एक बैच को गंभीर रूप से अमानक पाया गया। इसके बाद बैच नंबर I-7881 के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

पैरासिटामोल सहित अन्य दवाएं भी जांच में फेल

सर्दी-बुखार और दर्द में इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल व कॉम्बिनेशन दवाओं के कई सैंपल कालीबाड़ी लैब में जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में कुल चार दवाओं को अमानक घोषित किया गया है। इनमें गुणवत्ता और पैकेजिंग मानकों में खामियां पाई गई हैं, जिसके चलते इन्हें बाजार से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

दवाओं की गुणवत्ता और पैकिंग में मिली खामियां

रिपोर्ट के अनुसार कुछ दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जबकि कुछ मामलों में पैकिंग और ब्रांड जानकारी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। इसी आधार पर इन्हें ‘मिसब्रांडेड’ और अमानक श्रेणी में रखा गया है।

दवा भंडारण और बिक्री पर सख्त निगरानी के निर्देश

खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल ने सभी जिला औषधि अधिकारियों को अलर्ट रहने और संदिग्ध दवाओं की जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि किसी भी संदिग्ध स्टॉक की तुरंत जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

बाजार में इन दवाओं पर लगी रोक

जिन दवाओं के बैच पर रोक लगाई गई है, उनमें ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के अलावा एसेक्लोफेनेक और पैरासिटामोल संयोजन वाली कई टैबलेट्स शामिल हैं। इनमें विभिन्न राज्यों में उत्पादित बैच भी अमानक पाए गए हैं।

मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों को निर्देश

औषधि नियंत्रण विभाग ने दवा विक्रेताओं, थोक वितरकों और अस्पतालों से अपील की है कि वे संदिग्ध बैच की दवाओं का तुरंत उपयोग और बिक्री बंद करें तथा इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

 

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