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BRICS Meeting India 2026: दिल्ली में ब्रिक्स का शक्ति प्रदर्शन, मिडिल ईस्ट संकट पर महामंथन आज से, जानें क्यों बढ़ी डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी

BRICS Meeting India 2026: वैश्विक राजनीति के पटल पर अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। एक तरफ जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर चीन के बीजिंग पहुंचे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत की राजधानी नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय अहम बैठक गुरुवार से शुरू हो रही है। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सितंबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले यह बैठक एजेंडा तय करने के लिहाज से निर्णायक मानी जा रही है।

दिग्गज नेताओं का जमावड़ा और पीएम मोदी से मुलाकात

इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए दुनिया के ताकतवर देशों के प्रतिनिधि दिल्ली पहुंच चुके हैं। इनमें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची प्रमुख हैं। सम्मेलन के पहले दिन सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे, जो भारत की बढ़ती कूटनीतिक धमक को दर्शाता है।

ईरान की मौजूदगी और पश्चिम एशिया संकट

इस बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव है। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की यह पहली भारत यात्रा है। ईरान ने ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में भारत से अपील की है कि वह इस संघर्ष को रोकने में अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष भूमिका निभाए।

मुख्य चर्चा होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने और उससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर पर केंद्रित रहने की संभावना है।

ब्रिक्स का बढ़ता कद और ट्रंप की नाराजगी

ब्रिक्स अब सिर्फ पांच देशों का समूह नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक आबादी के लगभग 49.5% और ग्लोबल जीडीपी के 40% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाला एक शक्तिशाली मंच बन चुका है। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई के शामिल होने और 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ने से इसकी ताकत और बढ़ गई है।

यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स को एक बड़ी चुनौती के रूप में देखते हैं। ट्रंप की नाराजगी की कुछ मुख्य वजहें हैं:

  • अमेरिका फर्स्ट नीति: ट्रंप का मानना है कि ब्रिक्स देश अमेरिकी बाजार का लाभ तो उठाते हैं, लेकिन रणनीतिक मामलों में वाशिंगटन का साथ नहीं देते।
  • चीन का प्रभाव: ट्रंप को डर है कि चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल विकासशील देशों को अमेरिका के खिलाफ एकजुट करने के लिए कर रहा है।
  • ईरान की एंट्री: अमेरिका शुरू से ही ईरान जैसे देशों के इस समूह में शामिल होने के खिलाफ रहा है।

क्या बन पाएगी सर्वसम्मति?

बैठक में सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया संघर्ष पर एक साझा बयान जारी करना होगा। पिछले महीने हुई उप-विदेश मंत्रियों की बैठक में यूएई और ईरान के बीच तीखे मतभेदों के कारण सहमति नहीं बन पाई थी। इस बार देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत अपनी मध्यस्थता से एक सर्वसम्मत रास्ता निकाल पाता है या नहीं।

दिलचस्प बात यह भी है कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा के कारण चीन के विदेश मंत्री वांग यी दिल्ली नहीं आ रहे हैं, उनकी जगह चीनी राजदूत शी फीहोंग बैठक में शिरकत करेंगे।

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