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Jagannath Mandir: पूरी में ‘स्वर्ण भेष’ में निकले भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ, दर्शन को पहुंचे लाखों श्रद्धालु

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Jagannath Mandir: भगवान जगन्नाथ के ‘स्वर्ण भेष’ आयोजन को देखने के लिए बुधवार को ओडिशा के पुरी में करीब 15 लाख लोग जुटे। इस कार्यक्रम में रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों से सजाया गया था।

Jagannath Mandir रायपुर। भगवान जगन्नाथ के ‘स्वर्ण भेष’ आयोजन को देखने के लिए बुधवार को ओडिशा के पुरी में करीब 15 लाख लोग जुटे। इस कार्यक्रम में रथ पर बैठे भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों से सजाया गया था। प्रसिद्ध बारहवीं सदी के मंदिर के सिंह द्वार के सामने सेवायतों ने अपने रथों पर बैठे भगवान जगन्नाथ के भाई-बहनों (देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र) की मूर्तियों को भी सोने के आभूषणों से सजाया था।

भगवान जगन्नाथ को करीब 208 किलो सोने के आभूषणों से सजाया गया

सूत्रों ने बताया कि इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ को करीब 208 किलो सोने के आभूषण पहनाए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन के दौरान रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों से सजाया गया था। बारहवीं सदी के प्रसिद्ध मंदिर के सिंह द्वार के सामने रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के भाई-बहन देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की मूर्तियों को भी सेवायतों ने सोने के आभूषणों से सजाया। जानकारों के मुताबिक यह परंपरा 15वीं सदी से चली आ रही है। देवी-देवताओं की मूर्तियों के इस श्रृंगार को ‘स्वर्ण भेष’ कहा जाता है।

पुरी के जिलाधिकारी सिद्धार्थ शंकर स्वैन ने बताया की 15 लाख भक्तों के दर्शन की

पुरी के जिलाधिकारी सिद्धार्थ शंकर स्वैन ने कहा, “हमने 15 लाख भक्तों के दर्शन की व्यवस्था की है। श्री जगन्नाथ संस्कृति शोधकर्ता असित मोहंती के अनुसार, पुरी मंदिर में ‘स्वर्ण भेष’ अनुष्ठान 1460 में राजा कपिलेंद्र देव के शासनकाल के दौरान शुरू हुआ था, जब राजा दक्षिण भारत के शासकों के साथ युद्ध जीतने के बाद 16 गाड़ियों में सोना भरकर ओडिशा लाए थे।

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