पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना पर जानलेवा हमला क्यों हुआ? जानिए मौत से जुड़ी पूरी कहानी
Atar Singh Bhadana Death: राजस्थान के भरतपुर जिले के वैर पुलिस थाना क्षेत्र में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मृत्यु महज एक आकस्मिक दुर्घटना नहीं है; यह खनन, स्थानीय प्रभाव और ग्रामीणों के बीच लंबे समय से पनप रहे असंतोष की एक गंभीर और भयावह कहानी है। पूर्वी राजस्थान में इस अत्यधिक विवादास्पद राजनीतिक घटनाक्रम ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। आखिर किन परिस्थितियों में एक पूर्व विधायक को अपनी जान गंवानी पड़ी और इस खूनी संघर्ष के पीछे की असली वजह क्या थी, इसकी पूरी परतें अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।
इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले कौन थे और यह विवाद इतना कब और कैसे बढ़ा, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर कई बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस हिंसक झड़प के पीछे असल साजिश किसकी थी?
किसने किया हमला? 70 से 80 लोगों की उग्र भीड़ का धावा!
यह पूरी घटना 11 अक्टूबर, 2026 की शाम को शुरू हुई, जब भरतपुर के वैर पुलिस थाना क्षेत्र में आने वाले भौंडा और रायपुर गांवों के लगभग 70 से 80 स्थानीय ग्रामीणों और अज्ञात व्यक्तियों ने लाठी, पत्थर और घातक हथियारों से लैस होकर अचानक क्रशर संयंत्र पर धावा बोल दिया। क्रशर के पास की एक पहाड़ी पर खनन कार्य चल रहा था, उसी दौरान पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना भी वहां मौजूद थे।
उग्र भीड़ ने तुरंत पूर्व विधायक और उनके अंगरक्षक गगन शर्मा पर हमला कर दिया, उन्हें घेर लिया और बेरहमी से पीटा। पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि हिंसक हमले के दौरान भीड़ ने गोली चलाई, जिसमें अतर सिंह भड़ाना को गोली लगी। हालांकि, प्रारंभिक जांच के बाद, स्थानीय पुलिस ने अभी तक गोलीबारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट और जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।
2 साल पुराना माइनिंग विवाद पर खूनी संघर्ष
इस खूनी संघर्ष की जड़ खनन पट्टा और क्रशर संयंत्र के संचालन का मार्ग है, जिस पर काफी समय से विवाद चल रहा है। वैरा पुलिस स्टेशन के अनुसार, यह विवाद रातोंरात नहीं पनपा है; बल्कि, भौंडा और रायपुर गांवों के ग्रामीणों और क्रशर संचालक (एक पूर्व विधायक के परिवार) के बीच पिछले दो वर्षों से तनाव पनप रहा है। यह माइनिंग लीज पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना के नाम पर आवंटित थी। स्थानीय ग्रामीणों का लंबे समय से यह आरोप था कि इस क्रेशर और माइनिंग गतिविधियों के कारण उनके पारंपरिक रास्ते बंद हो रहे हैं, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और गांवों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
पिछले दो वर्षों से ग्रामीण इसी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन और धरने दे रहे थे। रविवार शाम को जब संयंत्र में खनन कार्य और मशीनरी फिर से शुरू हुई, तो ग्रामीणों का लंबे समय से दबा हुआ गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा और एक मामूली कहासुनी कुछ ही मिनटों में हिंसक झड़प में बदल गई।
पुलिस की भूमिका और इंटेलिजेंस फेलियर!
इस पूरी घटना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन के कामकाज और भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्रशर प्लांट और भौंडा गांव के बीच करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण और अराजक स्थिति बनी रही, जिसके बाद सूचना मिलने पर वैर पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल पूर्व विधायक और उनके सुरक्षा गार्ड को वैर उप-जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर रेफर कर दिया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है: पिछले दो वर्षों से चल रहे इस खनन विवाद और ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए, स्थानीय खुफिया एजेंसियों और पुलिस को किसी भी समय बड़े संघर्ष के भड़कने की आशंका क्यों नहीं हुई? रविवार को विवादित संयंत्र में काम शुरू होने पर पुलिस की अनुपस्थिति स्पष्ट रूप से प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।
भारी पुलिस बल तैनात और ताबड़तोड़ दबिश
पूर्व विधायक की मृत्यु की दुखद खबर भरतपुर संभाग और उनके गृह क्षेत्र में पहुंचते ही पूरा इलाका सदमे और तनाव में डूब गया। प्रशासन ने जातीय, सामाजिक या राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाए। भौंडा गांव, क्रेशर साइट और स्थानीय अस्पतालों के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, भरतपुर मुख्यालय से वैर में अतिरिक्त त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और विशेष पुलिस बल भेजे गए हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और घटनास्थल के आसपास के प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर हमलावर ग्रामीणों की पहचान करने का प्रयास कर रही है और मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। (एजेंसी)

