Wayanad Landslide: वायनाड में फिर कुदरत का खौफनाक कहर, देखते ही देखते भरभराकर ढह गई पहाड़ी, 4 की मौत
Wayanad Landslide: केरल का खूबसूरत पहाड़ी जिला वायनाड एक बार फिर भारी बारिश और विनाशकारी भूस्खलन (Landslide) के दर्द से कराह उठा है। मानसून की मूसलाधार बारिश के बीच वायनाड में एक बार फिर कुदरत का कहर कई परिवारों पर काल बनकर टूटा है। जिले में निर्माणाधीन अनक्कमपोयिल–कल्लाडी सुरंग सड़क परियोजना (Tunnel Road Project) के पास हुए एक भीषण हादसे में अब तक चार लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 9 से ज्यादा श्रमिक अभी भी मलबे के नीचे लापता बताए जा रहे हैं।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और बड़ी मानवीय त्रासदी बताया है।
बारिश के बीच अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई पहाड़ी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा कल्लाडी स्थित मीनाक्षी पुल के पास हुआ। यहाँ अनक्कमपोयिल–कल्लाडी सुरंग सड़क परियोजना का वायनाड छोर बनाने का काम चल रहा था। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश के चलते पहाड़ी की मिट्टी कमजोर हो गई थी और अचानक पहाड़ी का एक बहुत बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा।
हादसे के वक्त टनल प्रोजेक्ट में कई मजदूर काम कर रहे थे, जिन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे सीधे मलबे की चपेट में आ गए। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले लैंडस्लाइड का एक खौफनाक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है।
वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा का भावुक पोस्ट
इस दुखद घटना पर कांग्रेस नेता और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बेहद भावुक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन और रेस्क्यू टीमें पूरी ताकत झोंक रही हैं।
प्रियंका गांधी ने लिखा:
“जिन लोगों ने इस हादसे में अपने परिवार के कीमती सदस्यों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। इस मुश्किल समय में हम आपके साथ खड़े हैं। जो लोग अभी तक लापता हैं, उनके लिए हमारी प्रार्थनाएं हैं कि वे हिम्मत बनाए रखें। मैं यूडीएफ (UDF) कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और आम जनता से अपील करती हूं कि वे स्थानीय प्रशासन के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए राहत कार्यों में हर संभव मदद करें, ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई बाधा न आए।”
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन खुद राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। मौके पर पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। स्थानीय मंत्री टी. सिद्दीक और ए.पी. अनिल कुमार भी हालात का जायजा लेने के लिए तिरुवनंतपुरम से वायनाड के रास्ते में हैं।
2024 के जख्म हुए हरे
इस नए भूस्खलन ने वायनाड के लोगों के दिलों में पुराने खौफ को एक बार फिर जिंदा कर दिया है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में वायनाड ने देश के इतिहास का सबसे भीषण भूस्खलन झेला था, जिसमें 400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई गांव पूरी तरह नक्शे से मिट गए थे। एक बार फिर उसी तरह के हालात और लगातार हो रही बारिश ने पूरे इलाके में रेड अलर्ट जैसी चिंता पैदा कर दी है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और पहाड़ी इलाकों में न जाने की अपील की है।

