Sat. Sep 12th, 2026

‘यूरोप ने सैनिक भेजे तो सीधा युद्ध होगा’, BRICS के बीच दिल्ली से पुतिन का कड़ा संदेश

नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शिरकत करने राजधानी दिल्ली पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोपीय मुल्कों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। पुतिन ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि यूरोपीय देशों ने यूक्रेन की जमीन पर अपनी सेना भेजने का दुस्साहस किया, तो इसे सीधे तौर पर रूस के साथ युद्ध की शुरुआत माना जाएगा। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस का यूरोप को बेवजह डराने या संघर्ष को बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है।

‘यूरोप को रूस से डरने की जरूरत नहीं, पर लक्ष्मण रेखा तय रहे’

रूसी राष्ट्रपति ने यूरोप में फैलाई जा रही आशंकाओं को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि “यूरोपीय देशों को रूस से किसी खतरे की चिंता नहीं करनी चाहिए। ऐसा कोई खतरा न तो कभी था और न ही आज है। हम यूरोपीय देशों को कोई धमकी नहीं दे रहे हैं और न ही देंगे। आखिर हम ऐसा क्यों करेंगे? यूरोप के साथ किसी भी तरह के सैन्य टकराव का कोई तार्किक आधार नहीं है।”

पुतिन ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध और सोवियत संघ के विघटन के बाद जो व्यवस्थाएं बनी थीं, वे रूस की सहमति से तय हुई थीं। इन स्थापित संधियों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की अनदेखी करने वाला कोई भी कदम रूस के राष्ट्रीय हितों पर सीधा हमला माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे में जब यूरोपीय मुल्कों में यूक्रेन के भीतर सेना भेजने की चर्चाएं चल रही हैं, तो यह समझना जरूरी है कि इसका एक ही मतलब होगा रूस के साथ खुला युद्ध।

पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है संघर्ष, शांति वार्ता की कोशिशें जारी

उल्लेखनीय है कि फरवरी 2022 से चल रहा रूस-यूक्रेन संघर्ष अब अपने पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है। अमेरिका और यूरोपीय देश लगातार कीव को रक्षा और वित्तीय मदद पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर, कूटनीतिक स्तर पर तनाव घटाने की कोशिशें भी जारी हैं। हाल ही में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने मॉस्को में वार्ता के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात कर संभावित शांति फॉर्मूले पर चर्चा की थी।

ब्रिक्स के मंच से भारत-रूस साझेदारी को नई धार

राष्ट्रपति पुतिन ने शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक भी की। इस दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार देने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने ‘प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030’ को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई रफ्तार देने का संकल्प दोहराया।

About The Author