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धर्मांतरण के खिलाफ में 18 गांव के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कलेक्ट्रेट पहुंचकर की शिकायत

कवर्धा: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में धर्मांतरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। जिले के पंडारिया और बोडला ब्लॉक के 18 गांवों के ग्रामीण मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और वन क्षेत्रों में हो रहे धर्मांतरण के खिलाफ विरोध जताया। बैगा समुदाय समेत विभिन्न समुदायों के सदस्यों और जन प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर से मुलाकात की और धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कलेक्टर को दी गई अपनी शिकायत में ग्रामीणों ने बताया कि वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण गतिविधियां चल रही हैं। इस धर्मांतरण से आदिवासी समुदाय की स्वदेशी संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा, आदिवासी सदस्यों को ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए बहकाया जा रहा है।

धर्मांतरण की शिकायत लेकर 18 गांव के लोग पहुंचे

18 गांवों से सैकड़ों लोग धार्मिक धर्मांतरण के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में जमा हुए। प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मुलाकात की और मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने कलेक्टर से इन धर्मांतरण गतिविधियों को तत्काल रोकने और उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया।

कलेक्टर के सामने रखी तीन प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने कहा कि वन क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके चर्च बनाए जा रहे हैं। उन्होंने 40 से अधिक चर्चों की जांच की मांग की। उन्होंने उन सरकारी कर्मचारियों के मामलों की भी जांच की मांग की, जिन्होंने अनुसूचित जनजाति आरक्षण का फायदा उठाकर सरकारी विभागों में नौकरी हासिल की और बाद में ईसाई धर्म अपना लिया। समाज प्रमुखों ने बैगा और अन्य आदिवासी समाज के लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों को प्रलोभन दिया जा रहा है

ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं और ईसाई धर्म अपनाने के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा है। परिणामस्वरूप, कई आदिवासी लोग ईसाई धर्म अपना रहे हैं। (एजेंसी)

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